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मुलायम सिंह दलितों के नेता थे तो आप बीजेपी के साथ क्यों गये? OP राजभर ने दिया मजेदार जवाब

ओपी राजभर ने कहा कि पिछड़ों और दलितों के लिए दो ही नेताओं को अच्छा मानता हूं। पहले हैं मुलायम सिंह यादव और दूसरे हैं कांशीराम।

CM Yogi, OP Rajbhar
2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर ओपी राजभर समाजवादी पार्टी के साथ हैं (फोटो सोर्स: PTI/एक्सप्रेस फोटो: विशाल श्रीवास्तव)

उत्तर प्रदेश चुनाव का बिगुल बज चुका है। समाजवादी पार्टी इस बार बड़े दलों के बजाय छोटे दलों के साथ गठबंधन कर चुनावी मैदान में उतर रही है। समाजवादी पार्टी के सहयोगियों में सबसे बड़ा नाम सुभासपा का है, जिसके अध्यक्ष ओपी राजभर हैं। ओपी राजभर अपने बेधड़क बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। अब एक बार फिर ओपी राजभर ने पूर्व में हुए बीजेपी के साथ गठबंधन पर जवाब दिया है।

ओपी राजभर का मानना है कि जब से उन्होंने अखिलेश यादव के साथ मिलकर गठबंधन किया, तभी से ही इस गठबंधन के पक्ष में माहौल बनना शुरू हुआ। जब इस पर ओपी राजभर से पूछा गया कि अनुप्रिया पटेल तो कहती हैं कि आज ओबीसी और पिछड़े समाज का मुद्दा वे लोग उठा रहे हैं, जो सालों तक सत्ता में थे! खास कर आपकी सहयोगी पार्टी सपा सालों तक सत्ता में रही, कभी आपने पूछा कि पिछड़ों के लिए उन्होंने क्या काम किया ?  

ओपी राजभर ने जवाब देते हुए कहा कि सच्चाई तो ये है कि नेता जिस पार्टी में जाता है, उसी पार्टी का गुणगान करता है। अनुप्रिया पटेल झूठ बोल रही हैं। हम पिछड़े और दलितों के लिए दो नेताओं को अच्छा मानते हैं। पहले हैं कांशीराम, जिन्होंने लाखों लोगों को नेता बना दिया। उनके बनाए नेता सपा, बीजेपी और कांग्रेस में भी हैं। दूसरे नेता हैं मुलायम सिंह यादव। इन दोनों ने मिलकर पिछड़ों के बीच राजनीतिक चेतना जगाने का काम किया।

ओपी राजभर ने टीवी9 के एंकर से पूछा कि आपका कहना है कि मुलायम सिंह ने पिछड़ों के बीच राजनीतिक चेतना जगाई, ये बात आपको कब पता चली? इसके जवाब में राजभर ने कहा कि ‘जब हम पढ़ाई करते थे, तभी हमें ये पता चल गई थी।’ इस पर एंकर ने एक और सवाल पूछा कि फिर भी आप बीजेपी के साथ चले गये, वो ही 18 महीने के लिए? इस पर राजभर ने कहा कि ‘कीचड़ साफ़ करने के लिए कभी-कभी कीचड़ में घुसना पड़ता है। दो बार मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री की पंचायत को अमित शाह को आकर शांत करना पड़ा था। इसके बाद हम खुद बीजेपी से अलग हो गए।

बता दें कि 2017 विधानसभा चुनाव में ओपी राजभर ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। बीजेपी की सरकार बनने पर उन्हें मंत्री भी बनाया गया था लेकिन बीच कार्यकाल में ही में पिछड़ों और दलितों की अवहेलना का आरोप लगाकर उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और बीजेपी के साथ गठबंधन भी तोड़ने का ऐलान कर दिया था।

ओपी राजभर के बाद बीजेपी सरकार में तीन मंत्री समेत करीब डेढ़ दर्जन विधायक बीजेपी छोड़कर सपा में शामिल हो गये थे। इनमें से अधिकतर विधायकों और नेताओं ने बीजेपी पर गरीबों, पिछड़ों, दलितों और मजदूरों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया था।

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