ओडिशा के केन्दुझर जिले में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां बैंक से बार-बार पैसे निकालने की अनुमति नहीं मिलने से परेशान एक आदिवासी व्यक्ति ने अपनी मृत बहन के कंकाल को ही बैंक के सामने लाकर रख दिया। ऐसा उसने इसलिए किया ताकि यह साबित कर सके कि उसकी मौत दो महीने पहले हो चुकी है।

यह मामला ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लिपासी शाखा का है। 59 वर्षीय जीतू मुंडा, जो डायनाली गांव का निवासी है वह सोमवार सुबह बैंक खुलने से पहले ही करीब 3 किलोमीटर दूर से अपनी बहन के कंकाल को प्लास्टिक के थैले में लेकर शाखा पहुंचे और उसे बाहर रखकर उसके खाते में जमा 20,000 रुपये निकालने की मांग करने लगे।

बैंक ने भुगतान से कर दिया था इनकार

अधिकारियों के मुताबिक, उसकी बड़ी बहन कालरा मुंडा (62) का 26 जनवरी को निधन हो गया था। उन्होंने किसी को नॉमिनी नहीं रखा था। ऐसे में बैंक ने भुगतान से इनकार कर दिया और जरूरी कागजात लाने को कहा। बताया जा रहा है कि इसी वजह से परेशान होकर जीतू ने यह कदम उठाया।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उसे समझाकर तहसील कार्यालय से लीगल हेयर सर्टिफिकेट बनवाने की सलाह दी, ताकि वह राशि निकाल सके। पुलिस ने कंकाल को वापस ले जाकर दोबारा दफना दिया।

पटना थाना प्रभारी किरण प्रसाद साहू ने बताया कि जीतू अशिक्षित है और उसे लीगल हेयर या नॉमिनी की प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि बैंक अधिकारी उसे सही तरीके से प्रक्रिया समझाने में असफल रहे। कालरा मुंडा पहले ही अपने पति और इकलौते बेटे को खो चुकी थीं, और जीतू ही उनका एकमात्र जीवित रिश्तेदार है।

मंत्री सुरेश पुजारी ने दी प्रतिक्रिया

घटना के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और बैंक को जल्द से जल्द राशि जारी करने के निर्देश दिए गए। हालांकि, पटना ब्लॉक के बीडीओ मनस दंडापत ने कहा कि उनसे इस मामले में अभी तक कोई संपर्क नहीं किया गया है। जिला प्रशासन ने भी पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है, जबकि बैंक कर्मियों ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

वहीं, पूरे मामले में ओडिशा के मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा, “यह मेरे जीवन की सबसे शर्मनाक घटना है। कलेक्टर ने मामले का संज्ञान ले लिया है और दावेदार को बकाया राशि का भुगतान भी कर दिया गया है। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। अगर बैंक के किसी अधिकारी ने दुर्व्यवहार किया है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।”

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