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Supriya Sule On female Journalists: सुप्रिया सुले बोलीं – चैनल में काम करने वाली लड़कियां साड़ी क्यों नहीं पहनती, एंकर का जवाब – संस्कृति का सारा ठेका लड़कियों पर क्यों? लोगों ने भी किया ट्रोल

Viral Video : सुप्रिया सुले (Supriya Sule) के बयान पर एंकर अंजना ओम कश्यप (Anchor Anjana OM Kashyap) के साथ कई महिला पत्रकारों ने आपत्ति जताई है।

Supriya Sule On female Journalists: सुप्रिया सुले बोलीं – चैनल में काम करने वाली लड़कियां साड़ी क्यों नहीं पहनती, एंकर का जवाब – संस्कृति का सारा ठेका लड़कियों पर क्यों? लोगों ने भी किया ट्रोल
एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले (फोटो सोर्स – सोशल मीडिया)।

एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले (Supriya Sule) का महिला पत्रकारों (Female Journalists) को लेकर दिया गया एक बयान सोशल मीडिया (Social Media) पर तेजी वायरल (Viral) हो रहा है। इस बयान में उन्होंने महिला पत्रकारों के कपड़ों को लेकर कहा है कि चैनल में काम करने वाली लड़कियां साड़ी क्यों नहीं पहनती। सुप्रिया सुले के इस बयान पर कई महिला पत्रकारों ने आपत्ति जताई है, वहीं आम सोशल मीडिया यूज़र ने भी उनको ट्रोल किया है।

सुप्रिया सुले ने दिया ऐसा बायन

सुप्रिया सुले एक कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहीं थी। इस दौरान उन्होंने मराठी में कहा,”चैनल में काम करनेवाली लड़कियां साड़ी क्यों नहीं पहनती? वो शर्ट और ट्राउजर क्यों पहनती है? मराठी भाषा बोलते है, तो मराठी संस्कृति की तरह कपड़े क्यों नहीं पहनते। हम सभी चीज़ों का वैस्टनाइज़ेशन कर रहे है।” एनसीपी सांसद (NCP MP) के इस वीडियो को पत्रकार ने शिवांगी ठाकुर ने शेयर किया। जिस पर लोग तरह – तरह के कमेंट कर रहे हैं।

एंकर ने दिया ऐसा जवाब

एंकर अंजना ओम कश्यप (Anjana OM Kashyap) ने सुप्रिया सुले के बयान के लिखा,”कपड़े तो चैनेल में काम करने वाले लड़के भी मराठी संस्कृति के हिसाब से नहीं पहनते! ये ‘चैनेल में काम करने वाली लड़कियां’ पर ही इतना विशेष प्यार क्यों?” पत्रकार मीनाक्षी जोशी (Meenakshi Joshi) ने कमेंट किया कि मैंने लड़कों को धोती कुर्ते में न्यूज़ पढ़ते नहीं देखा। ना रिपोर्टिंग करते हैं ना कैमरा चलाते हैं, और तो और न्यूज़रूम में कोई प्रोड्यूसर भी नहीं पहनता। ऐसा क्यों ? सारी संस्कृति का ठेका लड़कियों का ही है, ऐसा क्यों?

पत्रकार मीनाक्षी खंडेवाल ने कमेंट किया कि चैनल में राज्य, देश, दुनिया के मामले नोटिस करने की बजाए “महिला पत्रकार” के कपड़ों पर बहुत ध्यान है। पूरी स्पीच नहीं सुनी इसलिए मालूम नहीं कि “पुरुष पत्रकार” के लिए भी कुछ ड्रेस कोड बताया या नहीं? या महिला नेता भी महिलाओं को बस उनके लुक्स तक ही गंभीरता से ले पा रही हैं No Surprise।

लोगों ने किया ट्रोल

पूजा नाम की एक ट्विटर यूज़र ने लिखा,”सुप्रिया जी, इतना तो आपको पता होगा कि शर्ट-ट्राउज़र easy to carry होते हैं…mic, earphones को साड़ी के साथ कैरी करना मुश्किल है…और रही बात कपड़े और संस्कृति की दुहाइयां देने की, तो ज़रा मेल एंकर्स को भी कुर्ता/पायजामा/धोती पहनने को बोल देतीं।” वैभव नाम के एक यूजर द्वारा लिखा गया कि जब से हमे राजनीति की समझ हुई लगभग तब से ही सुप्रिया सुले को हम एक जहीन नेता के तौर पर जानते रहे हैं।
लेकिन उनका यह बयान चौंकाने वाला है। वह ऐसा कैसे कह सकती हैं? उनका यह बयान बहुत ही इमप्रैक्टिकल है। बीजेपी नेता रोहित उपाध्याय ने लिखा कि जैसे-जैसे इनकी पार्टी छोटी होते जा रही है, वैसे-वैसे इनकी सोच भी छोटी होते जा रही है।

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First published on: 21-11-2022 at 12:39:07 pm
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