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शनिवार से शुरू हो रहे शारदीय नवरात्र, जानें कलश स्थापना मुहूर्त और पूरी विधि

Navratri 2016: इस बार प्रतिपदा तिथि दो दिन होने के कारण नवरात्रे नौ दिन की बजाय 10 दिन रहेंगे। यह महासंयोग 18 साल बाद बन रहा है।

आज नवरात्र का सातवां दिन है और इस दिन मां दुर्गा के सातवें रूप कालरात्रि की पूजा अर्चना की जाती है।

शुक्रवार को सर्व पितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष खत्म हो रहा है। शनिवार 01 अक्टूबर से मां दुर्गा की आराधना का महापर्व नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं, जो 10 अक्टूबर तक चलेंगे। इस बार प्रतिपदा तिथि दो दिन होने के कारण नवरात्रे नौ दिन की बजाय 10 दिन रहेंगे। यह महासंयोग 18 साल बाद बन रहा है।

जानिए किस दिन होगी किसकी पूजा:

1. अक्तूबर शनिवार – प्रतिपदा (देवी शैलपुत्री)
2. अक्तूबर रविवार – प्रतिपदा (देवी शैलपुत्री)
3. अक्तूबर सोमवार – द्वितीया (देवी ब्रह्मचारिणी)
4. अक्तूबर मंगलवार – तृतीया (देवी चन्द्रघंटा)
5. अक्तूबर बुधवार – चतुर्थी (देवी कूष्मांडा)
6. अक्तूबर बृहस्पतिवार – पंचमी (माता स्कंदमाता)
7. अक्तूबर शुक्रवार – षष्ठी (मां कात्यायनी)
8. अक्तूबर शनिवार – सप्तमी (मां कालरात्रि)
9. अक्तूबर रविवार – अष्टमी (मां महागौरी)
10. अक्तूबर सोमवार – नवमी (देवी सिद्धदात्री)
11. अक्तूबर मंगलवार – विजयदशमी, दशहरा।

कलश स्थापना का मुहूर्त:

प्रतिपदा तिथि एक अक्टूबर 2016 को 05:41 बजे शुरू होकर दो अक्टूबर 2016 को 07:45 बजे समाप्त होगी। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 1 अक्टूबर सुबह 06:17 बजे से 07:29 बजे तक है। नवरात्र व्रत की शुरुआत भी प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना से की जाती है।

कलश स्थापना की सामग्री:

मिट्टी का पात्र, शुद्ध मिट्टी, जौ, शुद्ध जल, गंगाजल, मौली, इत्र, साबुत सुपारी, दूर्वा, सिक्के, पंचरत्न, आम के 5 पत्ते, मिट्टी का दीया, बिना टूटे चावल, सप्तधान्य (सात प्रकार का अनाज), सप्तमृत्तिका, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, अक्षत, दूध, दही, घी, शहद, फूल, अगरबत्ती, पानी वाला नारियल और लाल कपड़ा।

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कलश स्थापना विधि :

सबसे पहले प्रातःकाल स्नान करके पूजन सामग्री के साथ पूजा स्थल पर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें। लकड़ी की चौकी रखकर उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और उसपर थोड़े चावल रखें। चावल रखते हुए गणेश जी का स्मरण करें।
एक मिट्टी के पात्र में जौ बोयें और इसपर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें। कलश पर रोली से स्वस्तिक या ‘ऊँ’ बनाएं। कलश के मुख पर कलवा बांधकर इसमें सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखें। कलश के मुख को चावल से भरी कटोरी से ढक दें। एक नारियल पर चुनरी लपेटकर इसे कलवे से बांधें और चावल की कटोरी पर रख दें। नीचे लिखे मंत्र का उच्चारण कर पूजन सामग्री और अपने शरीर पर जल छिड़कें –

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोअपी वा.
य: स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाहान्तर: शुचि:.

माँ शैलपुत्री की मूर्ती के सामने मिट्टी के ऊपर कलश रखकर हाथ में अक्षत, फूल, और गंगाजल लेकर वरूण देव का आवाहन करें। पूजन सामग्री के साथ विधिवत पूजा करें। उसके बाद आरती करें और प्रसाद वितरण करें।

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