मां के लिए उसके बच्चे का दुनिया से चले जाना बहुत दर्दनाक होता है, इंसान ही नहीं जानवर भी इस तकलीफ की गहराई को समझते हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसे देखकर दुनिया भर के लोग रो पड़े। ऑस्ट्रेलिया की संस्था जियोग्राफ़ मरीन रिसर्च ने ड्रोन से एक डॉल्फिन का वीडियो रिकॉर्ड किया है, इसका नाम फ्रैगल है, इसकी कहानी लोगों को भावुक कर रही है।

वीडियो में मां डॉल्फिन का दर्द देखकर लगता है कि प्यार और दर्द की कोई भाषा नहीं होती। वो जीव में बसी होती है, बस उसे देखने वाली आंखें चाहिए होती हैं, प्रकृति हमें बार-बार आईना दिखाती है इस समझने की जरूरत है।

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दो हफ्ते पहले मर गया था फ्रैगल डॉल्फिन का बच्चा

असल में फ्रैगल अपने दो हफ्ते के मरे हुए बच्चे को 6 दिन तक हिंद महासागर में अपने साथ लेकर तैरती देखी गई। एक पल के लिए भी उसने अपने बच्चे को छोड़ा नहीं। इसके पहले भी डॉल्फिन फ्रैगल के साथ बहुत बुरा हो चुका है वह इस दर्द को पहले भी महसूस कर चुकी है, वह इसी तकलीफ से पहले भी टूट चुकी है। रिसर्चर्स के मुताबिक ऐसा पहली बार नहीं है फ्रैगल इससे पहले भी अपने 4 बच्चे खो चुकी है।

इस बार भी किस्मत ने फ्रैगल का साथ नहीं दिया, उसका बच्चा सिर्फ 14 दिन बाद ही दुनिया छोड़ गया। बच्चे की मौत ने मानो फ्रैगल को सदमा दे दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि इस मुश्किल वक्त में फ्रैगल अकेली नहीं थी। बाकी डॉल्फिन भी उसके साथ-साथ तैर रही थीं मानो जैसे कह रही हों – “हम तुम्हारे साथ हैं।” वैज्ञानिक कहते हैं कि डॉल्फिन और व्हेल में ऐसा “गम जैसा व्यवहार” पहले भी देखा गया है। मांएं अपने मरे हुए बच्चों को कई दिन तक अपने साथ रखती हैं।

वीडियो देख भर आईं लोगों की आंखें

दिल तोड़ने वाला यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर आया लोगों के दिल टूट गए। एक यूजर ने लिखा – “याद रखो, जानवरों में भी भावनाएं होती हैं, उन्हें भी मौत का दर्द समझ आता है।”एक अन्य ने कहा, “पूरा झुंड उसके साथ था। देखा जा सकता है कि वे उसके साथ तैरते रहे, डॉल्फिन सच में कमाल के जीव हैं।”

तीसरे ने लिखा – “ये देखकर दिल दहल गया कि गम सिर्फ इंसानों का नहीं होता।” चौथे यूजर ने तो यहां तक कह दिया – “ये देखकर अब मैं कभी नॉनवेज भी नहीं खा पाऊंगी।” एक कमेंट सबसे ज्यादा दिल को छू गया, “हम इन बेचारे जानवरों को बेजान समझते हैं। उनके घर उजाड़ते हैं, उन्हें सताते हैं। आज के बाद मैं पूरी कोशिश करूंगी कि जानवरों को और तकलीफ न पहुंचाऊं, ये इसके हकदार नहीं हैं।” इस दर्दनाक खबर पर आपका क्या कहना है।

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आइए आपको ‘गंगाराम’ मगरमच्छ की पूरी कहानी सुनाते हैं… छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में एक गांव है- बावा मोहतरा। यहां के तालाब में एक मगरमच्छ रहता था। जिसे गांव वाले प्यार से गंगाराम पुकारते थे। यह मगरमच्छ सिर्फ एक जंगली जीव नहीं था, बल्कि गांव के लोगों के परिवार का हिस्सा माना जाता था। करीब 130 साल तक तालाब में रहने वाले इस मगरमच्छ ने ऐसी मिसाल कायम की, जिसकी चर्चा आज भी होती है। और अधिक पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…