जीता अन्नदाता हारा अहंकार- कृषि कानून वापस होने पर सोशल मीडिया में आ रही ऐसी प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस प्रवक्ता अलका लांबा ने लिखा कि माफीवीर आंदोलन वीरों से माफी मांगते हुए। ऊंट पहाड़ के नीचे आखिर आ ही गया। एंकर चित्रा त्रिपाठी ने लिखा कि बहुत अच्छा फैसला…. यकीनन किसानों को इसी बात का इंतजार था।

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जीता अन्नदाता हारा अहंकार- कृषि कानून वापस होने पर सोशल मीडिया में आ रही ऐसी प्रतिक्रियाएं (फोटो सोर्स – पीटीआई)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, आज मैं आपको, पूरे देश को यह बताने आया हूं कि हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस महीने के अंत में शुरू होने जा रहे संसद सत्र में, हम तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा कर देंगे।

मोदी सरकार द्वारा इस बिल को वापस लिए जाने के बाद से सोशल मीडिया पर कई प्रकार की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लिखा कि देश के अन्नदाता ने सत्याग्रह से अहंकार का सर झुका दिया। अन्याय के खिलाफ ये जीत मुबारक हो। सपा नेता राजीव राय ने लिखा कि अहंकार टूटने से पहले सैकड़ों किसानों को मौत के मुंह में पहुंचाने वाले की जवाबदेही भी तय हो।

कांग्रेसी नेता रोहन गुप्ता ने लिखा- जीता अन्नदाता, हारा अहंकार। पत्रकार सौरभ त्रिपाठी ने लिखा- दिल से बता रहा हूं, किसान आंदोलन के दौरान जब सिखों को खालिस्तानी बताया जा रहा था, तो बहुत डर लग रहा था…आज बहुत राहत मिल रही है। इस देश की एकता के लिए भी ये फैसला ज़रूरी था। पत्रकार सुशांत सिन्हा ने लिखा कि देश ने छप्पन इंच के सीने वाला पीएम चुना था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, कुछ के विरोध के सामने, सियासी नफा-नुक़सान देखकर एक बड़े वर्ग के समर्थन के बावजूद झुक जानेवाला पीएम नहीं।

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पत्रकार रवीश कुमार ने लिखा, एक साल पहले की तस्वीर याद करें। गोदी मीडिया किसान आंदोलन को आतंकवादी कहने लगा। उस अफ़सर को याद करें जिसने किसानों का सर फोड़ देने की बात कही और सरकार उसके साथ खड़ी रही। किसानों ने विज्ञान भवन में ज़मीन पर बैठकर अपना खाना खाया। उन कीलों को याद करें जो राह में बिछाई गई। कांग्रेस नेता अनिल यादव ने लिखा कि झुकते हैं तानाशाह, झुकाने वाला चाहिए।

आम आदमी पार्टी के विधायक गुलाब सिंह ने लिखा, प्रधानमंत्री जी कानून आज वापस लिया तो सवाल ये बनता हैं क्या पिछले 1 साल से आप झूठ पर झूठ बोले जा रहें थे कि जो आंदोलन कर रहें हैं वो किसान नहीं हैं। देश की न्यायपालिका को बेपरवाह प्रधानमंत्री पर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करना चाहिए। सैंकड़ों मौतों का जिम्मेदार कौन? कांग्रेस प्रवक्ता अलका लांबा ने लिखा कि माफीवीर आंदोलन वीरों से माफी मांगते हुए। ऊंट पहाड़ के नीचे आखिर आ ही गया। एंकर चित्रा त्रिपाठी ने लिखा कि बहुत अच्छा फैसला…. यकीनन किसानों को इसी बात का इंतजार था।

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