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ठेलेवाले ने खाक किए 23 हजार रुपए, सिर मुंडवाकर खाई कसम- मोदी की गद्दी जाने पर ही उगाऊंगा बाल

उन्होंने आगे लिखा- दूसरे दिन बैंक की लाइन में खड़े रहने के दौरान मेरा शुगर लेवल कम हो गया और मैं लगभग गिर गया। कुछ अच्छे लोगों ने मेरी मदद की और मुझे अस्पताल पहुंचाया।

Author Updated: November 28, 2016 7:01 PM
नोटबंदी के विरोध में एक शख्स ने मुंडवाया सिर। (Photo Source: Facebook)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रातो-रात नोट बंद करने की घोषणा के बाद से लोगों को पैसों के लिए दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। पैसे के लिए लोगों को बैंकों और एटीएम के बाहर लाइन लगानी पड़ रही है, फिर भी पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। लोगों के सामने दैनिक जरुरतों पूरी करने का भी संकट खड़ा हो गया। जहां एक ओर लोग पीएम मोदी के इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं वहीं पैसों के लिए मजबूर होने वाले कुछ लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं। इन्हीं में से एक है केरल के कोल्लम के रहने वाले याहिया। वह यहां एक छोटा-सा होटल और चाय की दुकान चलाते हैं। उन्होंने नोटबंदी का विरोध जताने के लिए आधा सिर मुंडवा लिया है।

केरल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ अशरफ कदक्कल ने फेसबुक पोस्ट करके इस बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कैसे नोटबंदी के चलते याहिया को परेशानी का सामना करना पड़ा और क्यों उसने अपना आधा सिर मुंडवा दिया है। उन्होंने उस शख्स के हवाले से लिखे गए फेसबुक पोस्ट में कहा- मेरा नाम याहिया है, मेरी उम्र 70 साल के करीब है और मैं केरल के कोल्लम जिले का रहने वाला हूं। मैं अपनी पत्नी और दो लड़कियों के साथ रहता हूं। पहले मैं पेड़ से नारियल तोड़ने और खेती काम करता था जब मुझे लगा है कि मैं अपनी बेटी की शादी नहीं कर पाऊंगा तो मैंने सबकुछ बेचकर गल्फ जाने का फैसला किया। मुझे वहां बहुत समस्याएं भी हुई। जो भी थोड़ा बहुत जमा किया उसे लेकर वापस आ गया है। उन पैसों और बैंक से लोन लेकर बेटी की शादी की। मैं खुद अपना पूरा होटल संभालता हूं, सारे काम खुद करता हूं। मैं आराम से काम कर सकूं इसलिए नाइट पहनता हूं। मेरे पास 23,000 रुपए के पुराने नोट थे। मैंने इन्हें एक्सचेंज करने के लिए बैंक गया और दो दिन लाइन खड़ा में रहा।

उन्होंने आगे लिखा- दूसरे दिन बैंक की लाइन में खड़े रहने के दौरान मेरा शुगर लेवल कम हो गया और मैं लगभग गिर गया। कुछ अच्छे लोगों ने मेरी मदद की और मुझे अस्पताल पहुंचाया। मेरे ऊपर को-ऑपरेटिव बैंक का लोन है, इसके लिए मेरे पास कोई खाता नहीं है। को-ऑपरेटिव में सारे ट्रांजेक्शन बंद होने के बाद मुझे महसूस हुआ कि मैं अपने पैसे कहीं भी नहीं जमा कर पाऊंगा। पाई-पाई जोड़कर बचाए अपने पैसे के लिए मैं कितने दिन तक लाइन में खड़ा रहता। मैंने अस्पताल से घर आने के बाद चूल्हा जलाया और सारे पैसे जला दिए। इसके बाद मैं नाई की दुकान गया और मैने अपना आधा सिर मुंडवा दिया। मैं तब तक अपने बाल वापस नहीं रखूंगा जब तक मेरी मेहनत और बचत को राख में मिलाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से बाहर नहीं कर दिया जाता है और इस देश को बचा नहीं लिया जाता।

इंडिया टुडे के मुताबिक डॉ अशरफ ने अपनी फेसबुक पोस्ट के आखिर में लिखा- डियर येहीक्का, तुन्हें इस तरह से जिक्र करने के लिए माफी चाहता हूं। तुम्हारा प्रदर्शन बहुत ही पावरफुल और अर्थपूर्ण है। उन्होंने याहिया का इस तरह जिक्र करने पर माफी भी मांगी है।

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