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कन्हैया कुमार ने रावण से की योगी आदित्यनाथ की तुलना, वायरल हो रहा है वीडियो

कन्हैया कुमार ने कहा, 'लाल देह लाली लसे, अरू धरी लाल लंगोट... तो हनुमान जी जो हैं वह वर्किंग क्लास देवता हैं। वह आपको कहीं भी मिल जाएंगे। दूसरे की पत्नी का अपहरण हुआ तो उसके लिए हनुमान जी ने लंका जला दी और यहां हनुमान जी के नाम पर लोग अपने ही देश के लोगों का घर जला रहे हैं... बताइए ये हनुमान जी का देश है।'

कन्हैया कुमार और योगी आदित्यनाथ (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष रहे कन्हैया कुमार ने हनुमान जयंती के मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जोरदार हमला बोला। हनुमान जयंती पर देश के कुछ हिस्सों में हुई हिंसक झड़प पर बोलते हुए कन्हैया कुमार ने यूपी सीएम की तुलना रावण तक से कर दी। उन्होंने कहा कि रावण ने संन्यासी का रूप धारण कर सीता का हरण किया था, देश को ऐसे झूठे संन्यासियों से सावधान रहना होगा। कन्हैया कुमार ने कहा, ‘आप बताइए, ये देश राम की उस परंपरा का देश है जहां सबरी का जूठा बेर खाया जाता है, सौतेली मां के लिए राजपाट छोड़ दिया जाता है… देख लीजिए जंगल से आए हैं योगी जी… भगवा वस्त्र धारण किए हुए हैं, लेकिन उनको मुख्यमंत्री की गद्दी चाहिए और कहते हैं कि राम भक्त हैं और वहां राम जी खुद गद्दी छोड़कर जंगल चले गए थे। इसको आप समझिए और एक बात और याद रखिएगा कि रावण ने संन्यासी का रूप लेकर सीता का हरण किया था, इन झूठे संन्यासियों से देश को बचाने की जरूरत है, याद रखिए।’

उन्होंने कहा, ‘लाल देह लाली लसे, अरू धरी लाल लंगोट… तो हनुमान जी जो हैं वह वर्किंग क्लास देवता हैं। वह आपको कहीं भी मिल जाएंगे। दूसरे की पत्नी का अपहरण हुआ तो उसके लिए हनुमान जी ने लंका जला दी और यहां हनुमान जी के नाम पर लोग अपने ही देश के लोगों का घर जला रहे हैं… बताइए ये हनुमान जी का देश है। आप सोचिए कि यह सब हनुमान जी के लिए किया जा रहा है।’

जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि राम ने दोस्ती निभाई थी, लेकिन आज लोग उन्हीं के नाम पर अपने दोस्त को दुश्मन बना रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘उस राम के नाम पर जो सबरी का जूठा बेर खाते हैं, जो अपने दोस्त सुग्रीव के लिए धोखा तक करने को तैयार हो गए, ये सोचकर कि दोस्ती ज्यादा बड़ी चीज है, नैतिकता बाद में… दोस्त के लिए दोस्ती निभाई, बालि का वध किया। वैसे राम के नाम पर अपने ही लोगों का, जिनके साथ आप कल तक फुटबॉल खेलते थे, खाते थे, हंसते थे, मजाक करते थे, लेकिन आज गांव-गांव में, शहर-शहर में सीमा खींच दी गई है। कल को तो यहां तक कह दिया जाएगा कि अब्दुल कलाम आजाद भी भारतीय नहीं थे।’

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