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अमेठी लड़ने की यह सजा देंगे मुझे – जब जेएनयू पर ज्योतिरादित्य सिंधिया से भिड़ गई थीं स्मृति ईरानी, जमकर हुई थी तकरार

लोकसभा सत्र में प्रश्नोत्तर काल के दौरान तत्कालीन गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने JNU के मुद्दे पर तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी से कई सवाल पूछे थे। सवाल-जवाब के दौरान ही दोनों नेताओं में जमकर तकरार हुई थी।

Updated: July 19, 2021 4:37 PM
अमेठी लड़ने की यह सजा देंगे मुझे – जब सिंधिया से लड़ पड़ी थीं स्मृति ईरानी (फोटो सोर्स – पीटीआई)

लोकसभा सत्र में प्रश्नोत्तर काल के दौरान कांग्रेस से तत्कालीन गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने JNU के मुद्दे पर तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी से कई सवाल पूछे थे। सवाल-जवाब के दौरान ही दोनों नेताओं में जमकर तकरार हुई थी। मोदी सरकार की पहली कैबिनेट में मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने कन्हैया कुमार और राहुल वेमुला के मुद्दे पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को खरी-खोटी सुनाई थी।

दरअसल लोकसभा सत्र के दौरान चल रहे प्रश्नोत्तर काल में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी बात शुरू करते हुए कहा था कि,’ मेरी बात सुन लो मैं आपकी बात सुन लूंगा। मैं  चुप होने वाला नहीं हूं, मैं आप के दबाव में आने वाला नहीं हूं। आप मेरी आवाज को संसद के अंदर दबा नहीं सकते हैं।  मुझे जो कहना है वह आपको सुनना ही होगा।’ उन्होंने हाथ जोड़ते हुए कहा था कि मैं आपसे सम्मान पूर्वक अपनी बात कहना चाहता हूं। इस दौरान संसद में हंगामा मचा हुआ था। ज्योतिरादित्य सिंधिया स्पीकर से बार-बार अपनी बात पूरी कर लेने की इजाजत मांग रहे थे। इसी हंगामे के बीच ज्योतिराज सिंधिया ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा था कि असहिष्णुता परिचय मत दो, मेरी बात सुन लो।

उनके इस सवाल पर स्मृति ईरानी ने भड़कते हुए उनका जवाब दिया था। उन्होंने कहा था कि, ‘ नारायण स्वामी जी ने जो पत्र लिखा उसमें महामहिम राष्ट्रपति के नाम का उल्लेख है।’ इसी दौरान स्मृति ईरानी पर आरोप लगाने वाले एक सांसद सदन छोड़कर बाहर जाने लगे। उनके बाहर जाने पर स्मृति ईरानी ने उन्हें ललकारते हुए कहा था कि, ‘ जाइए – जाइए मत सुनिए जवाब, क्योंकि आपकी इच्छा जवाब सुनने की थी ही नहीं। नियत में खोट थी आपके, इसलिए पीठ दिखा कर जा रहे हैं आज। जवाब सुनिए सिंधिया साहब। मुझसे आपने कहा न बैठो – बैठो सुनो, अब सुनने की बारी आपकी है अब सुनिए।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए हैं स्मृति ईरानी ने कहा था कि, ‘मैं अपने कर्तव्य का पालन कर रही थी और मुझे यहां सूली पर चढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। अमेठी लड़ने की यह सजा देंगे मुझे, तो सुनिए मेरा जवाब।’ स्मृति ईरानी के इस जवाब पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्लियामेंट पर अपनी बात रखते हुए कहा था कि हमारी मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी जी 4 महीनों में 5 चिट्टियां लिखी गई कार्रवाई करने के लिए। उनकी इस बात पर स्मृति ईरानी ने कुछ बोलना चाहा तो ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुस्कुराते हुए कहा था कि सुनने की क्षमता रखो भैया।

जिसके बाद स्मृति ईरानी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया पर प्रहार करते हुए कहा था कि कई लोगों आरोप लगाया और कहा कि किस अधिकार के साथ तुम चिट्टियां लिखती हो? उनकी इस बात पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उन्हें टोका तो वह गुस्से से आग बबूला हो गई थी। उन्होंने चिल्लाते हुए कहा था कि मैं स्वयं एक माइनॉरिटी परिवार से आती हूं। मुझे यहां बोलने से कोई रोक नहीं सकता है। मुझे मेरा उत्तर देने दीजिए। जिसका इंतजार मैं बहुत दिनों से कर रही थी। बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है। उन्हें मोदी कैबिनेट में भी जगह दी गयी है।

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