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हमारा संकल्प था कि एमपी से BJP को उखाड़ फेंकना है- जब जीत के जोश में भाजपा पर बरस पड़े थे ज्योतिरादित्य सिंधिया

मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के 15 साल के शासन के बाद कांग्रेस सत्ता में आई थी। इस जीत के बाद एक न्यूज़ चैनल के कार्यक्रम में पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारतीय जनता पार्टी और शिवराज सरकार को जमकर कोसा था।

July 22, 2021 2:41 PM
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Photo Source – PTI and AP)

मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के 15 साल के शासन के बाद कांग्रेस सत्ता में आई थी। इस जीत के बाद एक न्यूज़ चैनल के कार्यक्रम में पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारतीय जनता पार्टी और शिवराज सरकार को जमकर कोसा था। उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा था कि, ‘ हमारे संकल्प था कि एमपी से बीजेपी को उखाड़ फेंकना है।’

आज तक न्यूज़ चैनल के कार्यक्रम एजेंडा आज तक में पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया से मध्यप्रदेश में कांग्रेस की वापसी को लेकर कई सवाल किए गए थे। एंकर राजदीप सरदेसाई ने सिंधिया से सवाल पूछा था कि इस बात का गम है क्या कि इतनी मेहनत करने के बाद भी आप मुख्यमंत्री नहीं बन पाए हैं। उनके इस सवाल का जवाब देते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि, ‘ हम लोगों का एक संयुक्त प्रयास था कि मध्य प्रदेश में जिस सरकार ने भ्रष्टाचारी एवं अत्याचारी वातावरण तैनात किया था उसे हटा देना है। यह चुनाव कांग्रेस और बीजेपी का नहीं था। यह चुनाव उन प्रदेशों की जनता और बीजेपी के बीच का चुनाव था।’

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा था कि मेरा संकल्प था कि इस सरकार को….मध्यप्रदेश से उखाड़ कर फेंक देना है। मेरी कोई स्वयं की आशा और अभिलाषा नहीं थी मैंने यह कई बार चुनावी अभियान के दौरान और उसके पहले भी कई बार यह भावना मैंने प्रकट की है और जब समय आया मेरी पार्टी को निर्णय लेने का… जो भी मेरी पार्टी निर्णय लेती है। उसे सिर माथे लेना एक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी होती है। इस इंटरव्यू के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि कांग्रेस और बीजेपी में यही अंतर है कि बीजेपी केवल कहती है और कांग्रेस करके दिखाती है।

उनके इस जवाब पर एंकर राजदीप सरदेसाई ने पूछा था कि हर इंसान की कुछ आशा और अभिलाषा होती है अगर राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बन सकते हैं तो आप मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री क्यों नहीं बन सकते? एंकर के इस सवाल का जवाब देते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि, ‘हां हर मनुष्य के आशा और अभिलाषा होती है। मेरी भी आशा है मेरी भी अभिलाषा है, लेकिन मेरा ना कभी पद को लेकर से मोह था, और न आज है और न जिंदगी में कभी रहेगा।’

इस इंटरव्यू के दौरान सिंधिया ने कहा था कि अगर मेरी कोई अभिलाषा है तो वह यह है कि मैं जनता की प्रगति कर सकूं। जनता का विकास आप किसी भी रूप में कर सकते हो। जो यह कुर्सी की दौड़ हम नेताओं में होती है इस प्रवृत्ति को हमें बदलना होगा। मैं मानता हूं कि जब इम्तिहान की घड़ी मेरे सामने आई मैंने कोशिश की है कि मैं उचित निर्णय लूं गरिमा के साथ अपना व्यवहार तय करूं। उन्होंने अपने पिताजी का जिक्र करते हुए कहा था कि यह अतिशयोक्ति नहीं होगी यदि मैं कहूं कि मेरे पूज्य पिताजी होते शायद वह भी यही करते।

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