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जस्टिस काटजू ने ‘रास्कल बाल ठाकरे’ शीर्षक से लिखा ब्लॉग, बताया गुंडा और बेशर्म नेता

उन्होंने कहा कि 2012 में ठाकरे के देहांत पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, समेत सभी बड़ी हस्तियां श्रद्धांजलि देने पहुंची थी, लेकिन वो नहीं गए थे।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू। (फाइल फोटो)

अपनी विवादित टिप्पणियों के लिए मशहूर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मार्कंडेय काट्जू ने शिवसेना के पूर्व प्रमुख स्वर्गीय बाल ठाकरे के खिलाफ एक पोस्ट लिखी है। अपने ब्लॉग में लिखी पोस्ट को उन्होंने “द रास्कल बाल ठाकरे” शीर्षक दिया है। इस पोस्ट में उन्होंने बाल ठाकरे को सबसे ज्यादा धूर्त नेता बताया। उन्होंने कहा कि भारत के सबसे ज्यादा गुंडागर्दी करने वाले और बेशर्म नेताओं में बाल ठाकरे शायद सबसे ऊपर थे। उन्होंने कहा कि 2012 में उनके देहांत पर भारतीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी समेत सभी बड़ी हस्तियां श्रद्धांजलि देने पहुंची थी, लेकिन वो नहीं गए थे। काटजू ने कहा कि श्रद्धांजलि ना देने को लेकर उन्होंने अंग्रेजी अखबार द हिंदू में एक आर्टिकल भी लिखा था।

जस्टिस काटजू ने आगे अपनी पोस्ट में 19 नवंबर 2012 को छपे इस आर्टिकल को भी साझा किया है। उनके इस आर्टिकल का नाम Why I can’t pay tribute to Bal Thackeray (मै बाल ठाकरे को श्रद्धांजलि क्यों नहीं दे सकता) दिया था। अपने आर्टिकल में उन्होंने बाल ठाकरे निर्मित पार्टी शिवसेना द्वारा दूसरे प्रदेशों से आकर महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों पर की गई हिंसा का जिक्र किया था। उन्होंने भारतीय संविधान के आर्टिकल 19 (1) (e) का बारे में बताते हुए लिखा कि इसके मुताबिक भारत के हर नागरिक को किसी भी राज्य में रहने का अधिकार है।

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इस बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने लिखा कि किसी भी गुजराती, दक्षिण भारतीय, बिहार, यूपी या किसी भी राज्य के नागरिक का मौलिक अधिकार है कि वह महाराष्ट्र या किसी और राज्य में जाकर रह सके। ठीक उसी तरह जैसे महाराष्ट्र के नागरिक को किसी दूसरे राज्य में रहने की छूट है। लेकिन बाल ठाकरे की सोच थी कि महाराष्ट्र सिर्फ मराठी लोगों के लिए है, ना कि किसी गुजराती, दक्षिण भारतीय या उत्तर भारतीय के लिए। बाल ठाकरे की शिवसेना ने 1960 और 70 में दक्षिण भारतीयों पर हमला किया था, वहीं 2008 में बिहारी और यूपी से आए लोगों को अपना निशाना बनाया था। जाहिर है ऐसा वोट बैंक की राजनीति के लिए किया गया।

जस्टिस काटजू के ब्लॉग की तस्वीर। जस्टिस काटजू के ब्लॉग की तस्वीर।

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इस तरह उन्होंने कई कमियों को गिनाते हुए बताया था कि आखिर क्यों उन्होंने बाल ठाकरे को श्रद्धांजलि नहीं दी थी। बता दें कि एक दिन पहले ही बुधवार को काट्जू ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) पर तीखा प्रहार करते हुए कई ट्वीट किए थे। उन्होंने ट्विट में कहा था कि, “”मनसे असहाय लोगों पर हमले क्यों कर रही है? अगर आपमें साहस है तो मेरे पास आइए. मेरा डंडा तुम्हारा इंतजार कर रहा है और तुम्हारी खबर लेने के लिए अधीर है।” काट्जू ने अगले ट्वीट में लिखा, “मनसे के कार्यकर्ता गुंडे हैं, जिन्होंने अरब सागर का खारा पानी ही चखा है। मैं इलाहाबादी गुंडा हूं, जिसने संगम का पानी पिया है।”

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यहां पढ़ें उनकी फेसबुक पोस्ट:

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  1. D
    Dev Verma
    Oct 20, 2016 at 7:48 pm
    में बालासाहिब जी को जिन्द्घि में एक बार मिला और एक ऑवर तुक बात की. ट्रस्ट में मुम्बई में अगर बालासाहिब नहीं होते तो एक भी हिन्दू रह नहीं सकता था. काटजू एक सर फिरा आदमी है जो कुस भी बोल देता है. डॉन'टी ट्रस्ट हिम.
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    1. M
      Mohd.fareed khan
      Oct 21, 2016 at 4:15 am
      जो व्यक्ति देश के सर्वोच्च न्यायालय का योग्य चीफ़ जस्टिस रहा हो,वो आपकी नज़र में सिर फिरा है,ये देश के लोकतंत्र की विडंम्बना है,कि बिना अपनी हैसियत जाने लोग विद्वान व्यक्ति को कुछ भी कहने को स्वतंत्र है !
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      1. Hari Dutt
        Oct 20, 2016 at 9:14 am
        काटजू एक नालायक इंसान है, ठाकरे जी की म्हणता को समझने लायक अकल नहीं है !
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        1. R
          Rajendra Vora
          Oct 20, 2016 at 9:42 am
          ये मरेगा तो चारलोग कंधे के लिए जमाना भी मुश्किल होगा. अपने आप २३ लाख लोग बालासाहेब की अंतिमयात्रा में शामिल होते हे वही उनकी महानता हे.
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          1. Sidheswar Misra
            Oct 20, 2016 at 11:13 am
            कांग्रेस ने शिव सेना १९६९ में परदे के पीछे निर्माण कार्य था .स्वार्थ के राजनीत में ऐसे दल का निर्माण उसके फल आज दिख रहा है पहले तमिलियन का विरोध ,फिर उतर भारतीयों का अपमान .कांगेस बीजेपी का योग से
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            1. R
              Rajendra Vora
              Oct 21, 2016 at 7:23 am
              उत्तर प्रदेसवह और बिहार के लोग दर दर क्यों भटक रहे हे. की कारन हे इसके पीछे? कभी शांत मन से सोचो तो उत्तर मिल जायेगा. जाती, कुनबा से उप्पर उठो तो आप के वहां भी बहार आ जाएगी. वार्ना वो ही राज्य राज्य भटकना और जहाँ थाली भरी दिखी वही खाने बैठ गए.
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