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रवीश कुमार की FB पर पीएम को चुनौती- कैमरा है, माइक है, पकौड़ा भी, इंतजार कर रहा हूं

रवीश कुमार रोजगार के मुद्दे पर सरकार को अपने फेसबुक पोस्ट के जरिये शुक्रवार (19 जनवरी) को भी सरकार पर हमला कर चुके हैं। रवीश कुमार ने कहा था कि रोजगार के आंकडों का जश्न झूठ और फ्रॉड है।

वरिष्‍ठ टीवी पत्रकार रवीश कुमार। (Photo: Facebook/RavishKaPage)

जी न्यूज पर पीएम नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर जबर्दस्त बहस चल रही है। कुछ लोग इस इंटरव्यू को कई अहम मुद्दों पर पीएम का जवाब मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि ये इंटरव्यू फिक्स था जिसमें पीएम से कठिन सवाल नहीं पूछे गये थे। पत्रकार रवीश कुमार ने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट कर इशारा किया है कि उन्हें भी पीएम मोदी से इंटरव्यू लेने का इंतजार है। रवीश कुमार ने लिखा, ‘कैमरा भी है, माइक भी है, मौका भी है, ऑफ कोर्स पकौड़ा भी है, आई एम वेटिंग।’ बता दें कि जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी के साथ इंटरव्यू में रोजगार सृजन में पिछड़ने के आरोपों का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि, अगर कोई व्यक्ति जी टीवी के दफ्तर के बाहर पकौड़े बेचकर अपनी जिंदगी चलाता है तो क्या उसे रोजगार नहीं कहा जाएगा। बता दें कि जिस अकाउंट से यह पोस्ट किया गया है, रवीश कुछ वक्त पहले तक इसका इस्तेमाल करते रहे थे। अब इस अकाउंट पर उनकी सक्रियता काफी कम हो गई है। अब वह ज्यादातर @RavishKaPage के वेरिफाइड पेज के जरिए अपनी बातें रखते हैं।

बता दें कि रवीश कुमार रोजगार के मुद्दे पर सरकार को अपने फेसबुक पोस्ट के जरिये शुक्रवार (19 जनवरी) को भी सरकार पर हमला कर चुके हैं। रवीश कुमार ने कहा था कि रोजगार के आंकडों का जश्न झूठ और फ्रॉड है। रवीश कुमार ने कहा कि जो लोग पांच से सात करोड़ रोज़गार पैदा करने का दावा कर रहे थे वो छह लाख प्रतिमाह नौकरियां पैदा करने पर जश्न मना रहे हैं। लेकिन सरकार का ये दावा झूठ है और डरपोक मीडिया ने इसे छाप भी दिया है।

रवीश कुमार के इस फेसबुक पर दनादन प्रतिक्रियाएं आ रही है। कुछ लोग उनके स्टैंड को सही ठहरा रहे हैं, कुछ उन पर सवाल उठा रहे हैं। शुभेंदु शेखर ने लिखा,’ पेशेवर ईर्ष्या स्वाभाविक व सहज है, पर स्वघोषित सर्वोत्कृष्टता बहुत घातक होती है, सड़ांध बढ़ रही है।’ एक यूजर ने लिखा,’ कल मेरे प्रिय वक्ता श्री मोदी जी News पर बोले हमने बेरोजगारों को पकौड़े बेचने के लिय मुद्रा लोन दिया, अब उन्हें कौन बताये मुद्रा, जनधन का नाम लेते ही बैंक का पूरा स्टाफ ऐसे देखते हैं जैसे डिनचेक पूजा गाना सुना रही हो।’ मोहम्मद इरफान ने लिखा, ‘ये तो कन्फर्म है कि जिस दिन भी आएंगे “देसी-पिया” आपके न्यूज़रूम में गारंटी है कि पहले सवाल में ही माथे से पसीना पोछते हुए, पानी का गिलास मांगेंगे।’

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