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शहला राशिद का इशारों में वीसी और बख्शी पर निशाना, JNU को दिखाया टैंक के निशाने पर

पूर्व जेएनयू स्टूडेंट यूनियन अध्यक्ष शहला राशिद वैसे तो हमेशा ही अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में बनी रहती है।

शहला रशीद की ये तस्वीर उनके फेसबुक पेज से ली गई है।

पूर्व जेएनयू स्टूडेंट यूनियन अध्यक्ष शहला राशिद वैसे तो हमेशा ही अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में बनी रहती है। बीते दिनों भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सौरव गांगुली से जुड़ा ट्वीट करने के बाद इस बार उन्होंने एक अन्य ट्वीट किया है। ट्वीट में उन्होंने एक तस्वीर शेयर की है जिसे ‘महाकाव्य ग्राफिक’ नाम दिया है। जिस तस्वीर को उन्होंने शेयर किया है वो ‘बोलता हिंदुस्तान’ द्वारा डिजाइन की गई है। तस्वीर शेयर करते हुए शहला राशिद ने लिखा, ‘जब मैं बाहर थी।’ दरअसल पूर्व छात्र नेता ने जिस तस्वीर को शेयर किया है उसमें एक तरफ कन्हैया कुमार, शहला राशिद और दो अन्य शख्स नजर आ रहे हैं। तस्वीर के दूसरी तरफ पूर्व आर्मी अफसर जीडी बख्शी और जेएनयू चांसलर वीसी जगदीश नजर आ रहे हैं। यहां टैंक भी रखा हुआ है। जिसका मुंह शहला राशिद और कन्हैया कुमार की तरफ है। पहली नजर में तस्वीर देखने से लगता है कि शहला चांसलर जगदीश के उस बयान का इस तस्वीर के माध्यम से विरोध करती हुई नजर आ रही है जिसमें उन्होंने कैंपस में सरकार से टैंक रखने की मांग की थी। बता दें कि 23 जुलाई (2017) को कैंपस में ‘कारगिल विजय दिवस’ मनाया गया। इस दौरान यूनिवर्सिटी के वीसी एम जगदीश कुमार ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों से कैंपस में आर्मी टैंक रखे जाने की मांग की है। क्योंकि इसके जरिए छात्रों को वीर सैनिकों के बलिदानों की याद कराई जा सकेगी।

दूसरी तरफ शहला राशिद के इस ट्वीट पर कई यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं भी दी हैं। अनुराग तिवारी लिखते हैं, ‘जेएनयू में टैंक आने से 45 वर्षीय किशोर वैसे ही देशभक्त बनेंगे, जैसे नेहरू के नाम पर वे ‘आराम हराम’ मानते हैं।’ मिस्टर इंडिया लिखते हैं, ‘जेएनयू में 32 साल का वामपंथी प्रौढ़ पीएचडी और एनडीटीवी के हीरो श्रीमान कन्हैया कुमार। जिन्हें अबतक विप्रो और इन्फोसिस में फर्क नहीं मालूम।’ जोगिंदर सिंह लिखते हैं, ‘मैडम जी जिस दिन गरीब जनता को पता चल गया कि हमारे टैक्स के पैसे से सपोले पैदा हो रहे हैं तो उस दिन नहीं जनता बोलेगी।’ एक यूजर लिखते हैं, ‘टैंक तो एक बहाना है, दाढ़ी में तिनके वाले चोरों और आस्तीन के सांपों को बिल से बाहर निकलवनाना है।’ गौतम पटेल लिखते हैं, ‘याद रखना तुम्हें उस टौंक के आगे ना बांध दें। फिर पाकिस्तान भेजने का रास्ता साफ हो जाएगा।’

JNU में टैंक आने से 45 वर्षीय किशोर वैसे ही देशभक्त बनेंगे, जैसे नेहरू के नाम पर वे “आराम हराम है” मानते हैं pic.twitter.com/CLHIZKaBLV

— अनुराग तिवारी (@VnsAnuT) July 25, 2017

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