पृथ्वी पर संसाधन सीमित हैं, लेकिन जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में मौजूदा समय में ही लोगों को कई मामलों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और आने वाले समय में स्थिति के और खराब होने की संभावना है। ऐसे में लगातार ऐसे नए-नए खोज किए रहे, नए प्रोजेक्ट लाए जा रहे जिससे संसाधनों के मुख्य सोर्स से इतर एक वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जा रही है ताकि इंसानों को समस्या न हो।
मानव जीवन आसान बनाने के प्रयासों की कड़ी में जापान एक क्रांतिकारी प्रयोग करने जा रहा है। जापान जल्द लूना रिंग प्रोजेक्ट लॉन्च कर सकता है। अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो 13,000 टेरावॉट ऊर्जा का उत्पादन होगा, जो दुनिया की बिजली समस्या खत्म करने में सक्षम होगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार जापानी इंजीनियरिंग कंपनी शिमिजू कॉर्पोरेशन ने चांद के चारों ओर एक विशाल सोलर एनर्जी रिंग बनाने का प्रस्ताव दिया है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को “लूना रिंग” नाम दिया गया है, और यह सोलर पैनलों से बना होगा। प्रस्तावित लूना रिंग की परिधि लगभग 11,000 किलोमीटर होगी, और इसकी चौड़ाई लगभग 400 किलोमीटर होगी।
लूना रिंग दुनिया के ऊर्जा क्षेत्र में एक गेम चेंजर साबित हो सकती है। यह अंतरिक्ष में सूरज की रोशनी का इस्तेमाल करेगी, जहां बादल, वायुमंडल और रात के चक्र सोलर एनर्जी के उत्पादन में कोई रुकावट नहीं डालते। इसका मतलब है कि अंतरिक्ष-आधारित सोलर एनर्जी प्रणाली, जमीन पर बने सोलर फार्मों की तुलना में कहीं ज्यादा एनर्जी पैदा कर सकती है।
यह प्रोजेक्ट संभावित रूप से 13,000 टेरावाट बिजली पैदा कर सकता है—जो दुनिया की मौजूदा ऊर्जा जरूरतों से कहीं ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार चांद पर लगे सोलर पैनल से मिलने वाली एनर्जी चाद पर ही नहीं रहेगी। इसके बजाय, इसे माइक्रोवेव या लेजर में बदलकर वापस धरती पर भेजा जाएगा। रिसीविंग स्टेशन इन बीम को पकड़ेंगे, उन्हें वापस बिजली में बदलेंगे, और उन्हें ग्लोबल पावर ग्रिड में भेज देंगे।
अगर इसे सफलतापूर्वक लागू किया जाता है, तो यह क्लीन एनर्जी का एक लगातार मिलने वाला जरिया बन सकता है और जीवाश्म ईंधन पर हमारी निर्भरता कम कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार ‘लूना रिंग’ को बनाने का काम इंसान नहीं करेंगे। इसके बजाय, इसे चांद पर मौजूद अपने-आप काम करने वाले रोबोट बनाएंगे।
ये मशीनें चांद की मिट्टी को खोदकर निकालेंगी, उसे बिल्डिंग बनाने के सामान में बदलेंगी, और चांद की भूमध्य रेखा के साथ-साथ सोलर पैनल लगाएंगी। भारी-भरकम रोबोटिक मशीनें सामान खोदकर निकाल सकती हैं और हजारों किलोमीटर तक फैले विशाल सोलर पैनल लगा सकती हैं।
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