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बीजेपी सांसद ने इंदिरा गांधी को बताया राष्ट्रमाता, पार्टी भारत को देती है ये दर्जा

देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर, 1917 को हुआ था।

Author Updated: November 20, 2017 11:04 AM
इमरजेंसी के दौरान तत्‍कालीन प्रधानमंत्री और उनके पुत्र संजय गांधी के बीच मनमुटाव की खबरें आती रही हैं। (Source: AP)

भाजपा सांसद वरुण गांधी ने अपनी दादी, कांग्रेस नेता और दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 100वीं जयंती पर रविवार (19 नवंबर) को उनकी प्रशंसा करते हुए उन्हें ‘‘देश की मां’’ बताया। वरुण गांधी ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘सभी गुणों में साहस सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि साहस के बिना आप किसी और गुण का पालन लगातार कर ही नहीं सकते। एक महिला के लिए जो देश की मां थीं। आप याद आती हैं दादी…..मैं जानता हूं कि आप हमेशा हमें देख रही होती हैं ।’’ भाजपा भारत मां को राष्‍ट्रमाता बताती आई है। वरुण ने एक तस्वीर भी ट्वीट की जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री उस समय छोटे बच्चे रहे वरुण को अपनी गोदी में लिए हुए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे एवं पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी समेत गांधी परिवार के अन्य सदस्यों ने भी इंदिरा गांधी को श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर, 1917 को हुआ था।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रविवार को कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी धर्म व जाति के नाम पर भारतीय लोगों को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ धर्मनिरपेक्षता के लिए लड़ीं थीं। सोनिया ने इंदिरा गांधी के जीवन व उपलब्धियों पर ‘अ लाइफ ऑफ करेज’ फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस मौके पर सोनिया गांधी ने कहा, “मैंने इंदिराजी को ‘लौह महिला’ कहे जाते सुना है। लेकिन उनके चरित्र में लोहा महज एक तत्व था, उसमें उदारता व मानवता जैसे प्रमुख लक्षण भी थे।” सोनिया गांधी ने रविवार को इंदिरा गांधी से अपने संबंधों को याद किया, जो उनकी सास भी थीं।

सोनिया ने कहा, “हम 16 साल से ज्यादा समय तक एक घर में रहे। हमारे छोटे से परिवार की मुखिया थीं वह और इसी दौरान मैंने उन्हें करीब से जाना। मैंने उन्हें हर मूड व परिस्थिति में करीब से देखा है।” उन्होंने कहा, “मुझे समझ में आया थी कि कितनी शिद्दत से वह अपने देश के लिए सोचती थीं, गरीब व पीड़ित की मदद कितनी गहराई से करती थीं, वह कैसे अपने पिता व भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के अन्य महान पुरुषों व महिलाओं से प्राप्त सीख का निष्ठा से पालन करती थीं।”

पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा कि इंदिरा अपनी मौत में यह संदेश छोड़ गईं कि लोगों से की गई प्रतिबद्धता को कोई भी ताकत कभी भी नहीं मार सकती, चाहे वह जितनी भी शक्तिशाली हो। उन्होंने कहा कि अपने प्रधानमंत्री रहने के काल में बैंकों का राष्ट्रीयकरण करने और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं करने जैसे उनके फैसले समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं।

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