दादा और पोते के रिश्ते पर कई कहानियां- किस्से हैं, दोनों के बीच का बॉन्ड अक्सर देखने को मिल जाता है। पोते के रूप में एक बुजुर्ग शख्स को उसका सबसे छोटा दोस्त मिल जाता है जो उसके बुढ़ापे का सहारा होता है तो पोते को भी एक साथ खेलना वाला एक मार्गदर्शक, ख्याल रखने वाला और सही गलत बताने वाला बड़ा दोस्त मिल जाता है। दादा-पोते का एक ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो है जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं।

दादी जी ने जुगाड़ से बनाया चलती ट्रेन में झूला

असल में एक वीडियो में देखा जा सकता है कि एक छोटा बच्चा अपने दादा जी के साथ ट्रेन में यात्रा कर रहा है। वीडियो के अनुसार, वह रोने लगता है और झूला के लिए जिद करता है। अब दादा जी भला अपने पोते को रोता हुआ कैसे देख सकते हैं वे देसी जुगाड़ लगाते हैं और ट्रेन में ही पोते के लिए झूला बना देते हैं, वे पोते को प्यार से उस झूल में बैठाते हैं और धीरे-धीरे उसे झूलाने लगते हैं। बच्चा खुश हो जाता है औऱ रोना बंद कर देते है।

यह वडियो पर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। काफी लोग इसके पक्ष में हैं और कह रहे हैं कि प्यारे दादा जी की उम्र लंबी हों वहीं कई का कहना है कि लोगों ने ट्रेन को अपना घर समझ लिया है। एक ने लिखा है कि जहां सुविधा नहीं होती, वहां हमारे लोग रास्ता निकाल ही लेते हैं, दादा जी ने सही किया बच्चे को चुप भी तो कराना है। दादा जी ने एकदम सही दिमाग लगाया है।

‘खुश हो गया बच्चा’

दूसरे ने बच्चों का मनोरंजन करना तो अच्छी बात है लेकिन तरीका सही होना चाहिए सार्वजनिक जगह पर ऐसा करना मुझे ठीक नहीं लगता यह मात्र अपना अधिकार जमाना है और कुछ नहीं। इस पर एक अन्य यूजर ने जवाब दिया है कि लेकिन कुछ भी हो बच्चा तो खुश हो गया ना।

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‘ट्रेन को सबने घर बना डाला है’

तीसरे शख्स का कहना है कि दादा दादी जहां होते है वहां पोता भला कैसे रो सकता है। हमने भी देखा था यह वीडियो कई लोग नेगेटिव कमेंट कर रहे थे कि जीरो सिविक सेंस है लेकिन इसमें ऐसा कोई बात नहीं दिखती बहुत खूबसूरत वीडियो है। हालांकि एक अन्य यूजर ने कहा है कि हद है सबने ट्रेन को ही घर बना डाला है।

एक शख्स का कहन है कि दादा जी ने तो परमानेंट झूला बना दिया अब झूलता रहेगा तभी तो दादा और पोते की जोड़ी बहुत ही प्यारी होती है। एक यूजरन का कहना है कि दादा-दादी के लिए उनके पोते-पोची अलग ही जगह रखते हैं… मेरी बात दादा-दादी बनने के बाद ही समझ आएगी! आखिर दादा होते ही इतने अच्छे हैं जब जुगाड़ नहीं थे तब भी दादा जी ऐसा ही झूला बनाते थे। खैर, आपकी राय क्या है।

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फ्रैगल अपने दो हफ्ते के मरे हुए बच्चे को 6 दिन तक हिंद महासागर में अपने साथ लेकर तैरती देखी गई। एक पल के लिए भी उसने अपने बच्चे को छोड़ा नहीं। इसके पहले भी डॉल्फिन फ्रैगल के साथ बहुत बुरा हो चुका है वह इस दर्द को पहले भी महसूस कर चुकी है, वह इसी तकलीफ से पहले भी टूट चुकी है। रिसर्चर्स के मुताबिक ऐसा पहली बार नहीं है फ्रैगल इससे पहले भी अपने 4 बच्चे खो चुकी है। और अधिक पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…