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घर-घर जाने वाले अखबार की ऐसी गुस्ताखी – दैनिक भास्कर पर पड़ा छापा तो BJP सरकार को यूं ट्रोल कर रहे लोग

भास्कर अखबार पर इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग ने छापेमारी की है। कर चोरी के आरोप में अखबार के मालिकों के घर और संस्थान पर आयकर विभाग ने छापा मारा है।

July 22, 2021 1:25 PM
भोपाल में अरेरा कॉलोनी स्‍थ‍ित दैन‍िक भास्‍कर के एमडी सुधीर अग्रवाल के घर पर भी रेड पड़ी है।

भास्कर अखबार पर इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग ने छापेमारी की है। कर चोरी के आरोप में अखबार के मालिकों के घर और संस्थान पर आयकर विभाग ने छापा मारा है। इसके साथ ही टीवी चैनल समाचार भारत पर भी इनकम टैक्स का छापा पड़ा है। दैनिक भास्कर समूह के भोपाल, जयपुर, नोएडा, अहमदाबाद और मुंबई के ऑफिस पर इनकम टैक्स विभाग द्वारा कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बता दें कि दैनिक भास्कर ने कोरोनाकाल के दौरान सरकार की जमकर फजीहत की थी। कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा जो सरकार देती थी उसे गलत बताते हुए भास्कर हकीकत दिखाता था।

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान शवगृहों पर बढ़ती लाशों की खबर भास्कर ने प्रमुखता से अपने पहले पन्ने पर छापी थी। वहीं टीवी न्यूज़ चैनल भारत समाचार भी उत्तर प्रदेश में कोरोना की वजह से हो रही मौतों की खबरों को लगातार दिखा कर रहा था। इन दोनों मीडिया संस्थानों पर छापा पड़ने की खबर के बाद से सोशल मीडिया पर लोग नरेंद्र मोदी सरकार को ट्रोल कर रहे हैं।

इस छापेमारी को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला बोला है। नेताओं के साथ कई पत्रकार भी इस मुद्दे पर मीडिया संस्थान के साथ खड़े हुए नजर आ रहे हैं। अभय कुमार सिंह नाम के यूजर ने लिखा कि, ‘अब सब खुले में हो रहा है, जो सरकार को पसन्द नहीं वो लिखेंगे, बोलेंगे तो छापा पड़ेगा. वही बोलिए, सुनिए, लिखिए जो ये लोग चाहते हैं तोता बन जाना है पूरी तरह से।’

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया है, ‘रेड जीवी जी, प्रेस की आज़ादी पर कायरतापूर्ण हमला। दैनिक भास्कर के भोपाल, जयपुर और अहमदाबाद कार्यालय पर अब इनकम टैक्स के छापे। लोकतंत्र की आवाज़ को ‘रेडराज’ से नही दबा पाएंगे।’ पत्रकार रोहिणी सिंह ने लिखा कि दैनिक भास्कर के सभी दफ़्तरों में आयकर विभाग के छापा, दर्जनों चैनलों को अपने इशारों पर नचाने वाले एक अख़बार का सच तक बर्दाश्त नहीं कर सके।कितने कमजोर, कायर और डरपोक लोग बैठे हैं सरकार में? आपातकाल घोषित क्यूँ नहीं कर देते? अब बचा ही क्या है?

@RoflGandhi_ ट्विटर अकाउंट से लिखा गया कि ये सब करके तो गुमनाम ट्वीटर हैंडल नहीं बच पाते, ये घर घर जाने वाला अखबार ऐसी गुस्ताखी कर रहा था। पत्रकार विनोद कापड़ी ने लिखा कि डरा हुआ पत्रकार मरा हुआ लोकतंत्र बना रहा है।

वहीं पत्रकार अजीत अंजुम ने ट्वीट करते हुए लिखा कि अगर आप सत्ता से सवाल करने वाली पत्रकारिता करते हैं तो सलाखों के पीछे जाने को भी तैयार रहें। छापे तो ट्रेलर हैं। अगर मोदी और शाह की सत्ता के सामने लोटने/ लेटने और उनकी भजन/आरती वाली पत्रकारिता कर रहे हैं तो मस्त रहिए। आप तय कर लीजिए कि क्या करना है?

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