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जब अरनब गोस्वामी के शो में पत्रकार ने कहा- ऐसा भी कोई है जिसे बीजेपी उम्मीदवार बनाती और लेफ्टिस्ट विरोध न करते, इन्होंने अब्दुल कलाम को ‘संघी’ बताया था

अरनब गोस्वामी इस बात पर बहस कर रहे थे कि कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दल बीजेपी के उम्मीदवार को समर्थन क्यों नहीं दे रहे हैं।

Author Updated: June 21, 2017 1:05 PM
भारत के पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम। (File Photo)

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस समेत वामपंथी पार्टियों ने विरोध किया है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि विपक्ष कोविंद के खिलाफ उम्मीदवार उतारेगा। लेकिन मीडिया में ये सवाल पूछा जा रहा है कि क्या सर्वसम्मति से राष्ट्रपति चुनना संभव है? रिपब्लिक टीवी के संस्थापक और एंकर अरनब गोस्वामी ने सोमवार (19 जून) को अपने प्राइम टाइम शो में इसी मुद्दे पर डिबेट आयोजित की। डिबेट के दौरान उस वक्त असहज स्थिति उत्पन्न हो गई जब वरिष्ठ पत्रकार यशवंत देशमुख ने कह दिया कि ऐसा कोई उम्मीदवार ही नहीं है जिसे बीजेपी चुनती और वामपंथी पार्टियां विरोध न करतीं, उन्होंने तो डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम तक का विरोध किया था।

अरनब ने शो के शुरुआत में कोविंद के राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में चयन को बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक बताया। डिबेट में पत्रकार सबा नकवी, पत्रकार विनोद शर्मा, पत्रकार कुमार केतकर, बुद्धिजीवी कांचा इलैया, एमपीसीआई नेता तसलीम रहमानी, सीपीआई नेता सुनीत चोपड़ा, पत्रकार यशवंत देशमुख इत्यादि शामिल थे। देशमुख ने डिबेट में कहा कि जब साल 2002 में तत्कालीन बीजेपी सरकार में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वैज्ञानिक डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया तो कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने उन्हें समर्थन दिया लेकिन वामपंथी पार्टियों (सीपीएम, सीपीआई, सीपीआई-माले, फॉरवर्ड प्रेस एवं अन्य) ने उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा का बताकर उनका विरोध किया था।

डिबेट में शामिल सीपीआई नेता सुनीत चोपड़ा ने देशमुख के बयान का विरोध करते हुए कहा कि वामपंथी पार्टियों ने कलाम को कभी संघ का आदमी नहीं बताया तो देशमुख ने लाइव शो में ही 2002 में कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से जारी बयान पढ़कर उन्हें निरुत्तर कर दिया। डिबेट में बीजेपी नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा कि कांग्रेस नीत यूपीए-1 और यूपीए-2 शासनकाल में हुए दो राष्ट्रपति चुनावों में कांग्रेस ने बीजेपी से उम्मीदवार घोषित करने से पहले कोई चर्चा नहीं की थी, जबकि बीजेपी ने रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार घोषित करने से पहले कांग्रेस से चर्चा की।

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