हरियाणा में एकलव्य स्टेडियम के पास बने हुडा ग्राउंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। महिलाएं बैकग्राउंड में बज रहे गाने पर जमकर डांस कर रही हैं और गा भी रही है।

दरअसल, हुडा ग्राउंड में जनसभा आजोजित की गई थी, जहां पीएम नरेंद्र मोदी के पहुंचने से महिलाएं नाच-गाकर जश्न मना रही हैं। खास बात यह है कि बैकग्राउंड में जो गाना बज रहा है वह स्पेशली हाइड्रोजन ट्रेन पर पर बनाया गया है वो भी एकदम शानदार ढोल नगाड़े वाले म्यूजिक के साथ।

गाने का बोल है देश की ऐसी पहली ट्रेन… इस गाने के धुन पर महिलाएं नाच रही हैं और जश्न मना रही है। महिलाओं का हाइड्रोजन ट्रेन पर बने सॉन्ग पर नाचने-गाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जींद से सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन का उद्घाटन किया और फिर सभा को संबोधित किया। यह वायरल वीडियो पीएम के सभी को संबोधित करने के पहले का है।

पीएम मोदी ने दिखाई हरी झंडी

बता दें कि पीएम मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा में जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली भारत की पहली हाइड्रोजन चालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और इसे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का एक सफल उदाहरण बताया।

इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया, जहां हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें परिचालन में हैं। यह रेलवे क्षेत्र में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी यह ट्रेन दो घंटे में तय करेगी। इस दौरान यह 12 स्टेशनों पर रुकेगी। ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद प्रधानमंत्री ने 14,700 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कीं और उनकी आधारशिला रखी।

इसके बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने हाइड्रोजन चालित ट्रेन को ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का एक सफल उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि आज भारतीय रेलवे ने एक बड़ा कदम उठाया है और जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली यह हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन चालित ट्रेन है।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते बड़ी मात्रा में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी गैस और उर्वरकों की आपूर्ति होती है। उन्होंने आगे कहा कि पिछले तीन-चार महीनों से यह मार्ग लगातार संघर्ष का क्षेत्र बना हुआ है।

मोदी ने कहा कि युद्ध और तेल संकट के बावजूद भारतीय रेल और देश के विकास की रफ्तार नहीं रुकी है। उन्होंने कहा, ”यदि ऐसी स्थिति 2014 से पहले उत्पन्न हुई होती, तो भारतीय रेलवे का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया होता।” प्रधानमंत्री ने कहा, ”जब भी हाइड्रोजन ट्रेन का जिक्र होगा, तब जींद, सोनीपत और हरियाणा का नाम लिया जाएगा। मैं इसके लिए पूरे देश को बधाई देता हूं।”

कैसे चलती है यह ट्रेन?

आसमानी और सफेद रंग की आकर्षक डिजाइन वाली यह ट्रेन ‘हाइड्रोजन फ्यूल सेल’ प्रौद्योगिकी से संचालित होती है। इस तकनीक में हाइड्रोजन को बिजली में परिवर्तित किया जाता है, जिससे ट्रेन को चलाने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती है। इस प्रक्रिया में अवशेष के तौर पर सिर्फ जल-वाष्प निकलती है और कार्बन का उत्सर्जन बिल्कुल नहीं होता है।

डीजल ट्रेनों की तुलना में हाइड्रोजन चालित ट्रेनों से गैसों का उत्सर्जन नहीं होता, ये जीवाश्म ईंधन और उसके आयात पर निर्भरता घटाती हैं तथा काफी कम शोर के साथ संचालित होती हैं। बिजली से चलने वाली पारंपरिक ट्रेनों के विपरीत, इस ट्रेन के संचालन के लिए पूरी रेल लाइन पर ओवरहेड विद्युतीकरण अवसंरचना की आवश्यकता नहीं होती।

इसमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल के माध्यम से ट्रेन के भीतर ही बिजली का उत्पादन किया जाता है, जिससे यह स्वच्छ और अधिक दक्ष परिवहन विकल्प बन जाती है। हरित हाइड्रोजन के उपयोग से जीवाश्म ईंधन आधारित ताप विद्युत संयंत्रों से उत्पादित बिजली पर निर्भरता भी घटती है, जिससे भारत के टिकाऊ परिवहन की दिशा में परिवर्तन को बल मिलता है।

भारत की इस हाइड्रोजन ट्रेन में 10 डिब्बे हैं, जिससे यह अब तक विकसित सबसे लंबी हाइड्रोजन चालित यात्री ट्रेनों में शामिल हो गई है। इसका 3,200 हॉर्सपावर (एचपी) की क्षमता वाला प्रणोदन तंत्र इसे दुनिया में वर्तमान में परिचालनरत सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन चालित यात्री ट्रेनों में से एक बनाता है। 10 डिब्बों वाली ट्रेन लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगी।

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