दिल्ली से गुरुग्राम बेहतर है… यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि एक शख्स का कहना है। जाम और जलभराव के बाद भी शख्स को गुरुग्राम में रहना दिल्ली से कहीं बेहतर लहता है। भारी बारिश की वजह से गुरुग्राम में कामकाज ठप होने के कुछ दिनों बाद ही एक एंटरप्रेन्योर ने कहा है कि शहर की इन समस्याओं के बावजूद वह दिल्ली के बजाय गुरुग्राम में ही रहना पसंद करता है। इसकी वजह उसने करियर के मौके, हरियाली, मॉल, रेस्टोरेंट और कनेक्टिविटी को बताया है। अब इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।
एक्स पर एक पोस्ट में सौरभ ने गुरुग्राम के खराब सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर को माना लेकिन यह भी कहा कि दिल्ली के मुकाबले इस शहर में कई फायदे हैं। उन्होंने आगे कहा, “भले ही सिविक समस्याओं की वजह से गुरुग्राम का मज़ाक उड़ाया जाता है, लेकिन मैं गुरुग्राम से वापस दिल्ली नहीं जाना चाहता। यहां मिलने वाले करियर के मौके, हरियाली वाले डीएलएफ इलाके, मॉल, रेस्टोरेंट और राजस्थान व हरियाणा से सड़क कनेक्टिविटी दिल्ली से बेहतर है।”
इसके अलावा, सौरभ ने गेटेड कॉलोनियों और ब्लिंकइट एम्बुलेंस व अर्बन कंपनी की घरेलू मदद जैसी सेवाओं का भी ज़िक्र किया, जो उनके अनुसार दिल्ली के ज़्यादातर इलाकों में आम तौर पर उपलब्ध नहीं होती हैं।
जलभराव हो गया और ट्रैफ़िक के बाद सौरभ ने की ये पोस्ट
सौरभ की यह पोस्ट 24 अगस्त को हुई भारी बारिश के बाद आई, जिससे गुरुग्राम के कई इलाकों में जलभराव हो गया और ट्रैफ़िक बुरी तरह प्रभावित हुआ। शहर में सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे के बीच 75 मिमी बारिश दर्ज की गई और स्कूल बसें घंटों तक फंसी रहीं। ज़िला प्रशासन ने भी दफ़्तरों को सलाह दी थी कि वे कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दें और स्कूलों को 25 अगस्त को ऑनलाइन क्लास चलाने के लिए कहा था। 26 अगस्त को IFFCO चौक के पास सड़क का एक हिस्सा धंस गया क्योंकि पानी ने उसके नीचे की मिट्टी बहा दी थी।
मानसून से जुड़ी बार-बार होने वाली समस्याओं के बावजूद, सौरभ ने कहा कि पिछले चार दशकों में गुरुग्राम में काफी सुधार हुआ है। 1980 के दशक के मध्य में शहर में अपनी यात्राओं को याद करते हुए, उन्होंने कहा कि सड़कों, सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक गतिविधियों, बिजली और पानी की आपूर्ति में सुधार हुआ है। उन्होंने आगे कहा, “गुरुग्राम एक दिन ज़रूर बेहतर होगा। पिछले चार दशकों में इसमें काफी सुधार हुआ है। मेरी दादी का परिवार यहीं का है। 1980 के दशक के मध्य में गुड़गांव आने की मेरी शुरुआती यादों के बाद से सड़कों, सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक गतिविधियों और यहां तक कि बिजली और पानी की आपूर्ति में भी काफी सुधार हुआ है।”
अपनी पोस्ट में सौरभ ने यह भी कहा कि चार बदलाव गुरुग्राम को भारत के ज़्यादातर शहरों से बेहतर बना सकते हैं: बिजली का निजीकरण, ड्रेनेज सिस्टम में बड़े सुधार, पानी की प्रोसेसिंग क्षमता को दोगुना करना और गुरुग्राम नगर निगम (MCG) द्वारा बेहतर सफाई। उनकी पोस्ट पर एक्स पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं हैं, कुछ यूज़र्स ने गुरुग्राम और दिल्ली के बीच की उनकी तुलना से असहमति जताई।
ब्रोकर्स और बिल्डर्स के हाइप है गुरुग्राम
एक यूज़र ने कहा कि गुरुग्राम “सिर्फ़ ब्रोकर्स और बिल्डर्स के हाइप यानी बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई बातों पर बना है” और तर्क दिया कि दिल्ली हर मामले में “कहीं बेहतर” है। एक अन्य यूज़र ने सुझाव दिया कि दोनों शहरों की तुलना करने से पहले सौरभ जैन को नेहरू पार्क, लोधी गार्डन, गार्डन ऑफ़ फाइव सेंसेज़, खान मार्केट, GK-2 M ब्लॉक और राजौरी गार्डन जैसी जगहों पर जाना चाहिए।
उन्होंने दिल्ली के अलग-अलग तरह के पार्कों, बाज़ारों, कैफ़े और शहर की कुल मिलाकर जीवनशैली की ओर इशारा किया। हरियाणा में सबसे ज़्यादा रेवेन्यू देने वाले शहरों में से एक, गुरुग्राम में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के तहत आने वाले इलाकों में 408 रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाने के बावजूद, मॉनसून के दौरान भारी जलभराव की समस्या बनी रहती है। खैर, इस पर आपकी क्या राय है?
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पिता का होना किसी खजाने से कम नहीं… ये लाइनें शायद आपने भी पढ़ी होंगी। इस लाइन का मतलब हम सभी बहुत अच्छे से समझ सकते हैं। एक बेटे की नौकरी चली गई इसके बाद उसने दुखी मन से अपने पिता को फोन किया और कहा कि पापा जॉब चली गई। इसके बाद पिता न घबराए न दुखी हुए उन्होंने अपने बेटे को एक ही लाइन में ऐसे हौसला बढ़ाया कि उनका रिएक्शन अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। और अधिक पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…

