गुरुग्राम के गढ़ौली कलां गांव में एक घर के बाथरूम में सांप के फुफकारने की आवाज आ रही थी। आवाज सुनकर परिवार के लोग घबरा गए, उन्होंने बाथरूम अच्छी तरह चेक किया मगर कहीं कुछ नहीं मिला। हालांकि फुफकारने की आवाज लगातार आ रही थी और वह तेज होती जा रही थी जैसे सांप फुफकारता है ठीक वैसे ही। परिवार के लोग घबरा गए और उन्होंने वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट को बुलाया। इसके बाद जो हुआ वह देखकर परिवार वाले सहम गए क्योंकि टॉयलेट सीट के नीचे छह फीट लंबा स्पेक्टेकल्ड कोबरा फुफकार रहा था, सांप का यह प्रजाति काफी जहरीला होता है। जिसके काटने से किसी भी शख्स की मौत हो सकती है।
फुफकार सुनकर सहम गया परिवार
घर के लोग तब घबरा गए जब उन्हें टॉयलेट सीट के अंदर से लगातार फुफकारने की आवाज़ सुनाई दी, लेकिन उन्हें सांप दिखाई नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने वाइल्डलाइफ़ कंज़र्वेटर अनिल गांडस को मौके पर बुलाया। एक्सपर्ट ने सावधानी से टॉयलेट सीट को थपथपाया, जिसके बाद फुफकारने की आवाज़ और तेज़ हो गई। इसके बाद टॉयलेट सीट को तोड़कर खोला गया, क्योंकि उसके नीचे एक संकरी जगह पर बहुत ज़हरीला स्पेक्टेकल्ड कोबरा छिपा हुआ देखा गया था। लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद, टीम ने सुरक्षित रूप से सांप को घर से बाहर निकाला। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, लोगों का कहना है कि इस वीडियो ने तो एक नया डर पैदा कर दिया है।
गुरुग्राम में क्यों बढ़ रहे हैं सांप के मामले? एक्सपर्ट ने बताई वजह
अनिल ने कहा कि तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण और निर्माण कार्यों के कारण जंगल और खेत कम हो रहे हैं, जिससे सांपों के लिए प्राकृतिक आवास और भोजन की कमी हो रही है। नतीजतन, चूहे और अन्य भोजन की तलाश में साँप रिहायशी इलाकों और घरों में ज़्यादा आ रहे हैं।
उन्होंने आगे बताया कि अकेले अगस्त महीने में गुरुग्राम में लगभग 70 सांपों को बचाया गया, जबकि पिछले तीन महीनों में बचाए गए साँपों की कुल संख्या 200 से ज़्यादा हो गई है। साथ ही उन्होंने निवासियों को मॉनसून के मौसम में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। अनिल गंडास ने कहा कि रात में ज़मीन पर सोने से बचें, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और खाने की चीज़ों को ढककर रखें ताकि चूहे आकर्षित न हों, क्योंकि चूहों के कारण सांप घरों में आ सकते हैं। उन्होंने लोगों से यह भी अपील की कि सांप के काटने पर घरेलू नुस्खों पर भरोसा करने के बजाय तुरंत डॉक्टरी मदद लें और एंटी-वेनम इलाज करवाएं।
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आइए आपको ‘गंगाराम’ मगरमच्छ की पूरी कहानी सुनाते हैं… छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में एक गांव है- बावा मोहतरा। यहां के तालाब में एक मगरमच्छ रहता था। जिसे गांव वाले प्यार से गंगाराम पुकारते थे। यह मगरमच्छ सिर्फ एक जंगली जीव नहीं था, बल्कि गांव के लोगों के परिवार का हिस्सा माना जाता था। करीब 130 साल तक तालाब में रहने वाले इस मगरमच्छ ने ऐसी मिसाल कायम की, जिसकी चर्चा आज भी होती है। और अधिक पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
