Google Trends: झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का गुस्सा अब सड़कों से विधानसभा तक पहुंचता दिख रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। आंदोलन अब 14वें दिन में पहुंच चुका है और छात्र सरकार से सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

मामला उस समय और गरमा गया जब लंबे धरने के बीच कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठ गए। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। आंदोलन में शामिल छात्रों की मांगों में JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करना, कथित अनियमितताओं की CBI जांच और आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार जैसे मुद्दे शामिल हैं।

स्टेडियम से उठी आवाज, अब विधानसभा तक पहुंचने की तैयारी

जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम इन दिनों सिर्फ धरना स्थल नहीं रह गया है। यहां जुटे अभ्यर्थी इसे अपने भविष्य की लड़ाई के केंद्र के रूप में देख रहे हैं। कई दिनों से जारी धरने के बीच छात्रों ने तिरंगा यात्रा और आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है।

अब उनकी नजर विधानसभा के मानसून सत्र पर है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार की ओर से उनकी मांगों पर ठोस भरोसा नहीं मिला तो 10 अगस्त को विधानसभा घेराव किया जाएगा। इससे आंदोलन सीधे सरकार और विधानसभा की राजनीतिक गतिविधियों के बीच आ सकता है।

भूख हड़ताल ने बढ़ाई चिंता

आंदोलन के दौरान छात्रों का आमरण अनशन भी सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेताओं की तबीयत बिगड़ने की खबरें सामने आई हैं। छात्र नेता राहुल क्रांति की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

इस घटनाक्रम ने आंदोलन को और गंभीर बना दिया है। अब यह सिर्फ परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवालों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि छात्रों के स्वास्थ्य और आंदोलन की दिशा को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।

सरकार बातचीत को तैयार, छात्रों ने रखी अपनी शर्त

लगातार बढ़ते दबाव के बीच झारखंड सरकार ने छात्रों से बातचीत का रास्ता खोला। लेकिन छात्रों ने भी बातचीत को लेकर अपनी शर्तें सामने रख दीं। छात्र चाहते हैं कि बातचीत सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ हो और पूरी बातचीत कैमरे के सामने तथा मीडिया की मौजूदगी में हो। उनका तर्क है कि लंबे समय से चल रहे विवाद में अब बंद कमरे की बातचीत के बजाय पारदर्शी संवाद जरूरी है।

बातचीत के लिए छात्रों ने 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तैयार किया, जिसमें छात्र प्रतिनिधियों के साथ पत्रकार और वकील भी शामिल हैं।

चार मंत्रियों के पैनल से मुलाकात, लेकिन समाधान अभी दूर

सरकार की ओर से बनाए गए चार मंत्रियों के पैनल ने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की। बैठक के बाद छात्रों की ओर से संकेत दिया गया कि उनकी बात सरकार और मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएगी तथा आगे फिर बातचीत हो सकती है।

लेकिन फिलहाल आंदोलन खत्म करने के संकेत नहीं हैं। छात्रों ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। यानी बातचीत का दरवाजा खुल गया है, लेकिन भरोसे की दूरी अभी खत्म नहीं हुई है।

विपक्ष भी आंदोलन के मुद्दे पर सरकार को घेर रहा

छात्र आंदोलन का असर अब विधानसभा की राजनीति में भी दिखाई देने लगा है। मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही विपक्षी NDA विधायकों ने भी इस मुद्दे को उठाया। इससे भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों की शिकायतें राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई हैं।

यही वजह है कि सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ छात्रों के आंदोलन को संभालना और दूसरी तरफ विधानसभा के भीतर विपक्ष के सवालों का जवाब देना।

सवाल सिर्फ एक परीक्षा का नहीं

इस पूरे आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छात्रों की नाराजगी केवल किसी एक परीक्षा के परिणाम तक सीमित नहीं दिख रही। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में बार-बार विवाद और कथित अनियमितताओं से युवाओं का भरोसा प्रभावित हो रहा है।

सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए एक परीक्षा सिर्फ कुछ घंटों की परीक्षा नहीं होती। उसके पीछे वर्षों की तैयारी, आर्थिक खर्च और उम्र की सीमा से जुड़ा दबाव होता है। इसलिए जब परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठता है तो उसका असर अभ्यर्थियों के भविष्य पर सीधे पड़ता है। यही कारण है कि रांची का यह आंदोलन धीरे-धीरे बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

10 अगस्त पर टिकी निगाहें

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार और छात्रों के बीच अगली बातचीत किस दिशा में जाती है। अगर बातचीत से कोई ठोस समाधान निकलता है तो आंदोलन शांत हो सकता है। लेकिन अगर छात्रों को फिर सिर्फ आश्वासन मिला, तो 10 अगस्त का विधानसभा घेराव आंदोलन को एक नए चरण में ले जा सकता है।

सोशल मीडिया पर भी JPSC और JSSC से जुड़े हैशटैग के जरिए छात्र अपनी आवाज उठा रहे हैं। आंदोलन को लेकर सार्वजनिक समर्थन और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।

फिलहाल रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से उठी छात्रों की आवाज का अगला पड़ाव विधानसभा है। सरकार बातचीत की मेज तक पहुंच चुकी है, लेकिन क्या वह छात्रों को आंदोलन खत्म करने के लिए वह भरोसा दे पाएगी जिसकी वे मांग कर रहे हैं? इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।