Google Trends: पाकिस्तान में एक बार फिर सियासी पारा हाई है! पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल में बंद हुए पूरे तीन बरस बीत चुके हैं, और इस “काली सालगिरह” पर बुधवार को देशभर की सड़कों पर उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा।
रावलपिंडी से लेकर लाहौर तक, कराची से लेकर मियांवाली तक – हर जगह एक जैसा नजारा। आंसू गैस, लाठीचार्ज और गिरफ्तारियों का सिलसिला। लाहौर के मशहूर मॉल रोड पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा, तो रावलपिंडी में सैकड़ों कार्यकर्ता हिरासत में ले लिए गए। हैरानी की बात ये कि इस हंगामे में कवरेज कर रहे पत्रकार भी पुलिस के निशाने पर आ गए – मीडिया संगठनों ने इस पर सख्त एतराज जताया है।
पेशावर बना विरोध का गढ़
जिस खैबर पख्तूनख्वा में खुद पीटीआई की सरकार है, वहां की राजधानी पेशावर में सबसे बड़ी रैली हुई। सिर्फ रिहाई की मांग नहीं, बल्कि सीधी चेतावनी भी दी गई।
मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी ने एक बयान से हलचल मचा दी। उनका कहना है कि अगर सुनवाई में इंसाफ मिले, तो इमरान खान महज आधे घंटे में जेल से बाहर आ सकते हैं। लेकिन साथ ही धमकी भी दे डाली – अगर न्याय नहीं मिला, तो 27 सितंबर को देशभर से लोग इस्लामाबाद कूच करेंगे।
लाहौर में पकड़े गए 25 लोगों में पार्टी के पांच विधायक तक शामिल बताए जा रहे हैं। पंजाब भर में यह आंकड़ा 50 के पार पहुंच गया है।
परिवार का दर्द भी छलका
इमरान खान की बहन अलीमा खान ने ऐलान किया कि भाई की रिहाई की लड़ाई अब नए मोड़ पर पहुंचने वाली है। वहीं पार्टी नेताओं का आरोप है कि जेल में न सही इलाज मिल रहा है, न परिवार से मुलाकात – और इसका असर उनकी सेहत, यहां तक कि आंखों की रोशनी पर भी पड़ा है।
सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, अब एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी वैश्विक संस्था भी मैदान में उतर आई है। संगठन ने साफ कहा कि तीन साल से निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिली, लंबा एकांत कारावास झेलना पड़ा और महीनों से परिवार व वकीलों से मुलाकात तक बंद है।
दूसरी तरफ, शहबाज शरीफ सरकार इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करती आई है और मामलों को पूरी तरह कानूनी बताती है। अब सबकी नजरें 27 सितंबर पर टिकी हैं – क्या सच में पूरा पाकिस्तान इस्लामाबाद की ओर कूच करेगा, या मामला बातचीत की मेज पर सुलझेगा? यह देखना दिलचस्प होगा।
