Google Trends: देश में हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन अब तेजी से गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। खराब लाइफस्टाइल, बढ़ता प्रदूषण, तनाव और अनियमित खानपान के कारण अब यह बीमारी सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है। विशेषज्ञों के अनुसार स्थिति इतनी चिंताजनक हो चुकी है कि शहरों में हर तीसरा व्यक्ति और गांवों में हर चौथा व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अंबुज राय ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि हाइपरटेंशन को “साइलेंट किलर” कहा जाता है, क्योंकि करीब 90 प्रतिशत मामलों में लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई बार मरीज को तब पता चलता है जब शरीर को गंभीर नुकसान पहुंच चुका होता है।

डॉक्टरों के अनुसार अचानक बीपी बढ़ने से किडनी फेल होना, लकवा और हार्ट फेल जैसी गंभीर समस्याओं के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लोग अक्सर शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। डॉ. राय ने बताया कि दिल के दौरे के करीब 25 प्रतिशत मामलों में शुरुआती स्तर पर मरीज और कई बार डॉक्टर भी भ्रमित हो जाते हैं। सीने में दर्द को गैस या सामान्य परेशानी समझ लिया जाता है, जिससे इलाज में देरी हो जाती है और जान का जोखिम बढ़ जाता है।

पराली और प्रदूषण से बढ़ रहा खतरा

एम्स के शोध में वायु प्रदूषण और हाई ब्लड प्रेशर के बीच सीधा संबंध सामने आया है। हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार में किए गए अध्ययन में पाया गया कि जिन इलाकों में पराली जलाने की घटनाएं ज्यादा थीं, वहां हाइपरटेंशन के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदूषण शरीर की नसों में सूजन बढ़ा देता है, जिससे दिल को रक्त संचार के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। बल्लभगढ़ में किए गए एक अध्ययन में यह सामने आया कि पराली जलाने के 100 मामलों पर हाई बीपी के मामलों में 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई। डॉ. राय के अनुसार जिन क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर कम है, वहां हाई ब्लड प्रेशर के मामले भी अपेक्षाकृत कम पाए गए हैं।

बचाव के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों ने लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, संतुलित भोजन लेने, रोजाना व्यायाम करने और तनाव कम रखने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते जांच और सही जीवनशैली अपनाकर हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारी से काफी हद तक बचाव संभव है।

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दुनिया अब ऐसे दौर की ओर बढ़ रही है जहां साफ हवा में सांस लेना भी एक बड़ा स्वास्थ्य जोखिम बन सकता है। ताजा अध्ययनों में यह चेतावनी सामने आई है कि आने वाले दशकों में वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियां और समय से पहले मौतों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार वायु प्रदूषण को वैश्विक स्तर पर सबसे घातक पर्यावरणीय खतरा माना जाता है। यह फेफड़ों के कैंसर, अस्थमा, हृदय रोग, श्वसन संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है। यहां तक कि कनाडा जैसे विकसित देशों में भी हर साल लगभग 17,000 लोगों की समय से पहले मौत और अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान इससे जुड़ा हुआ पाया गया है।