मुंबई के तारदेव में 6.5 करोड़ रुपये के 2 बीएचके अपार्टमेंट की एक लिस्टिंग ने हाउसिंग से जुड़े भेदभाव पर बहस छेड़ दी है। यह बहस तब शुरू हुई जब एक वीडियो में दावा किया गया कि इस बिल्डिंग में सिर्फ़ शाकाहारी लोग ही रह सकते हैं।

900 स्क्वेयर फ़ीट कारपेट एरिया वाले इस अपार्टमेंट में एक अटैच्ड बालकनी है, जहां से साउथ मुंबई और समुद्र का शानदार नज़ारा दिखता है। इस प्रॉपर्टी के साथ गाड़ी खड़ी करने के लिए एक खास जगह (सरफ़ेस/पोडियम पार्किंग) भी मिलती है। हालांकि, लिस्टिंग में साफ़ तौर पर ‘सिर्फ़ शाकाहारी’ (Vegetarian Only) लिखा है, जिससे पता चलता है कि मांसाहारी लोगों को इस बिल्डिंग में घर खरीदने या रहने की इजाज़त नहीं है।

इस वीडियो को प्रॉपर्टी डीलर और इन्फ्लुएंसर भावेश कावरे ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है, जिन्हें ‘प्रॉपर्टी ट्रांज़ैक्शन गुरु’ के नाम से भी जाना जाता है। इसे 46,000 से ज़्यादा बार देखा गया है और 700 से ज़्यादा लाइक्स मिले हैं।

खाने-पीने की आदतें ही घर का फ़ैसला क्यों करें?

इस लिस्टिंग की कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने आलोचना की है, कई लोगों ने सवाल उठाया है कि क्या खाने-पीने की पसंद के आधार पर यह तय होना चाहिए कि कौन किसी रिहायशी इमारत में घर खरीद सकता है या रह सकता है। कुछ यूज़र्स ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, MNS प्रमुख राज ठाकरे और अन्य संगठनों समेत कई नेताओं और अधिकारियों को टैग करके इस कथित पाबंदी पर कार्रवाई की मांग की है।

प्रतिक्रिया देने वालों में शिंदे सेना के युवा नेता गुरजोत सिंह कीर भी शामिल थे, जिन्होंने इस लिस्टिंग की आलोचना की और इसमें शामिल ‘बाहर रखने वाली’ शर्त पर सवाल उठाए। यह विवाद मुंबई में लंबे समय से चल रही उस बहस के बीच सामने आया है जिसमें हाउसिंग सोसायटियों द्वारा खान-पान की आदतों, समुदाय या अन्य व्यक्तिगत पसंद के आधार पर पाबंदियां लगाने का मुद्दा उठाया जाता रहा है। मुंबई के बेहद प्रतिस्पर्धी रियल एस्टेट मार्केट में अक्सर ऐसे विवाद देखने को मिलते हैं कि क्या हाउसिंग सोसायटियां इन आधारों पर फ्लैट की बिक्री या उनमें रहने पर रोक लगा सकती हैं।

टारदेव में 6.5 करोड़ का अपार्टमेंट

लिस्टिंग के अनुसार, यह अपार्टमेंट टारदेव में है और इसका कारपेट एरिया 900 वर्ग फुट है। इसमें एक बालकनी है और यहां से समुद्र का नज़ारा दिखता है। इसकी कीमत लगभग 6.5 करोड़ है। इस प्रॉपर्टी में मैकेनिकल या बेसमेंट पार्किंग के बजाय सरफेस/पोडियम पार्किंग की सुविधा है।

हालांकि इस लिस्टिंग ने ऑनलाइन काफी चर्चा पैदा कर दी है, लेकिन वीडियो से यह तुरंत स्पष्ट नहीं होता है कि ‘सिर्फ़ शाकाहारी’ (Vegetarian Only) वाली शर्त सोसाइटी का आधिकारिक तौर पर लागू नियम है, विक्रेता द्वारा लगाई गई शर्त है या प्रॉपर्टी ब्रोकर द्वारा इस्तेमाल किया गया विवरण है।

फिर भी इस वायरल लिस्टिंग ने इस बात पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या मुंबई के हाउसिंग मार्केट में निवासियों की खान-पान की पसंद के आधार पर प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए। कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने रिहायशी सोसायटियों में अधिक समावेशिता (सबको साथ लेकर चलने की भावना) की मांग की है।

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