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साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की 136वीं जयंती पर गूगल ने डूडल बना कर दी श्रद्धांजलि

प्रेमचंद्र का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही गांव में हुआ था। उन्होंने 13 वर्ष की आयु से ही रचनाएं लिखना प्रारंभ कर दिया था। प्रेमचंद्र ने लगभग 300 कहानियां तथा चौदह बड़े उपन्यास लिखे।

Author Updated: July 31, 2016 11:30 AM
डूडल में ग्रामीण भारत की झलक है जैसा कि प्रेमचंद की कहानियों में भी होता था। (Image: Google)

सर्च इंजन गूगल ने साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के 136वें जन्मदिन पर उनके सम्मान में विशेष डूडल बनाकर उन्हें याद किया। गूगल ने आज के लिए अपने लिखने के प्रारुप में भी बदलाव किया है। जहां पहले Google लिखा होता था वहां आज दूठठ दूाह (google) लिखा है। डूडल में ग्रामीण भारत की झलक है जैसा कि प्रेमचंद की कहानियों में भी होता था। गूगल के मुताबिक उनका डूडल 1936 में आए प्रेमचंद के आखिरी साहित्य ‘गोदान’ से प्रेरित है।

मुंशी प्रेमचंद किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने अपनी कहानियों और उपन्यासों में आमजन की पीड़ा को शब्दों के जरीए पिरोया है। इनका जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही गांव में हुआ था। इनके पिता अजायब राय डाकखाने में मामूली नौकर के तौर पर काम करते थे। उनकी माता का नाम आनंदी देवी था। अपनी मां से प्रेरित होकर उन्होंने एक रचना ‘बड़े घर की बेटी’ में आनंदी नामक पात्र बनाया था।

प्रेमचंद के बचपन का नाम धनपत राय था। जब धनपत आठ वर्ष के थे तब बीमारी के कारण इनकी मां का देहांत हो गया। प्रेमचन्द तब अकेले पड़ गए थे, क्योंकि उनकी बड़ी बहन का विवाह हो चुका था और पिता को अपने काम से समय नहीं मिलता था। इनका विवाह भी 15 साल की आयु में कर दिया गया था, मगर कुछ समय बाद ही उनकी पत्नी का देहांत हो गया। कुछ समय बाद उन्होंने बनारस के बाद चुनार के स्कूल में शिक्षक की नौकरी की, साथ ही बीए की पढ़ाई भी। बाद में उन्होंने एक बाल विधवा शिवरानी देवी से विवाह किया, जिन्होंने प्रेमचंद की जीवनी लिखी थी।

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उन्‍होंने अपना पहला साहित्यिक काम गोरखपुर से उर्दू में शुरू किया था। उनकी पहली रचना कहीं प्रकाशित नहीं हो पाई और बाद में खो गई। सोज-ए-वतन उनकी पहली रचना थी। यह भी अजब संयोग हैं कि जिस रावत पाठशाला में उन्‍होंने प्राथमिक शिक्षा ली थी, वहीं पर उनकी पहली पोस्टिंग शिक्षक के रूप में हुई। उसी दौरान वह बालेमियां मैदान में महात्‍मा गांधी का भाषण सुनने गए। महात्‍मा गांधी के ओजस्‍वी भाषण का उन पर ऐसा प्रभाव पड़ा कि उन्‍होंने अंग्रेजी हुकूमत में सरकारी नौकरी से त्‍यागपत्र दे दिया और स्‍वतंत्र लेखन करने लगे।

यही वजह है कि आजादी की चिंगारी फूटने के बाद मुंशी प्रेमचंद ने जिन कालजयी उपन्‍यासों की रचना की, उसमें अंग्रेजी हुकूमत की झलक भी साफ दिखाई देती है। प्रेमचंद्र ने लगभग 300 कहानियां तथा चौदह बड़े उपन्यास लिखे।

प्रेमचंद की चर्चित कहानियां-
मंत्र, नशा, शतरंज के खिलाड़ी, पूस की रात, आत्माराम, बूढ़ी काकी, बड़े भाईसाहब, बड़े घर की बेटी, कफन, उधार की घड़ी, नमक का दरोगा, पंच फूल, प्रेम पूर्णिमा, जुर्माना आदि।

प्रेमचंद के चर्चित उपन्यास-
गबन, बाजार-ए-हुस्न (उर्दू में), सेवा सदन, गोदान, कर्मभूमि, कायाकल्प, मनोरमा, निर्मला, प्रतिज्ञा, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, वरदान, प्रेमा और मंगल-सूत्र (अपूर्ण)।

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