किसी ने अपने ‘अब्बा जान’ का पैर पकड़ के कुर्सी से उतार दिया था नीचे – अखिलेश यादव पर गौरव भाटिया ने यूं कसा तंज

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां पूरी मजबूती से मैदान पर उतर गई हैं।

Uttar Pradesh, Yogi Adityanath
BJP प्रवक्ता गौरव भाटिया (फोटो सोर्स – सोशल मीडिया)

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के ‘अब्बा जान’ वाले बयान पर विपक्ष उनको घेर रहा है। इसी विषय पर एक न्यूज़ चैनल में डिबेट हो रही थी। जिसमें एक सवाल का जवाब देते हुए बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि किसी ने अपने ‘अब्बा जान’ का पैर पकड़कर कुर्सी से नीचे उतार दिया था।

इस डिबेट के दौरान एंकर ने जब गौरव भाटिया से सवाल पूछा कि ऐसे तीन काम बताइए जो उत्तर प्रदेश की जनता ने इन साढ़े 4 सालों में किया हो? इसके साथ ही एक ऐसा भी काम बताइए जिसको लेकर आपके मन में कसक हो कि यह काम किया जाना चाहिए था? इसके जवाब में गौरव भाटिया ने कहा कि आप अपने दिल पर हाथ रख कर बताइए कि हमेशा डिबेट में ऐसा क्यों होता है कि विरोधी पार्टी के तीन प्रवक्ता होते हैं।

उनकी इस बात पर डिबेट में उपस्थित कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने टोकते हुए कहा कि इनका रोना शुरू हो गया है। जिसके बाद एंकर ने रागिनी नायक को समझाते हुए कहा कि गौरव भाटिया की बात पूरी हो जाने के बाद आप अपनी बात रखें। गौरव भाटिया ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा कि इस डिबेट में मुझ पर व्यक्तिगत टिप्पणियां की गई लेकिन मैं उसका जवाब नहीं दूंगा।

उन्होंने कहा कि लेकिन मैं एक बात का जवाब देता हूं कि इस डिबेट में कहा गया कि कोई पैर पकड़ता था..कोई एहसान फरामोश है। यह पूरा देश जानता है कि ऐसा बेटा कौन है। यह पहेली बुझाना मुश्किल नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी ने अपने ‘अब्बा जान’ का पैर पकड़कर कुर्सी से उतार दिया था। गौरव भाटिया ने आगे कांग्रेस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी की लड़ाई हमसे है ही नहीं।

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि इन की लड़ाई एआईएमआईएम से है.. इनकी एक दो सीटों को लेकर एक दूसरे में प्रतिस्पर्धा है। उन्होंने दावा किया कि जितनी सीटें हम लखनऊ शहर से जीतकर आएंगे उससे कम सीटें ही कांग्रेस की उत्तर प्रदेश में आएंगी। बता दें कि उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां पूरी मजबूती से मैदान पर उतर गई हैं। जहां सत्ता पर काबिज बीजेपी वापस से कुर्सी पाना चाहती है तो वहीं विपक्षी पार्टियां योगी आदित्यनाथ सरकार की नाकामियों का प्रचार करते हुए अपना राजनीतिक समीकरण बनाने में लगी हैं।

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