पेरिस में गणेश चतुर्थी जश्न का वीडियो चर्चा का विषय है। यहां फ्रांस की सड़कों पर पारंपरिक जुलूस निकला गया। इस समय भक्तों द्वारा नारियल फोड़ने के वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है, जिससे यूजर्स इस जश्न को लेकर दो गुटों में बंट गए हैं। हालांकि उत्सव के समय फ्रांस की सड़कों पर ‘गणपति बप्पा मोरया’ गूंज रहा था और लोगों का उत्साह देखने लायक था।
दरअसल, रविवार को सैकड़ों हिंदू भक्त गणेश चतुर्थी मनाने के लिए फ्रांस की राजधानी में एक रंग-बिरंगे जुलूस के साथ इकट्ठा हुए। ला चैपल इलाके में स्थित ‘श्री मणिका विनायक अलायम’ मंदिर ने इस सालाना गणेश उत्सव का आयोजन किया था। इस इलाके में दक्षिण एशियाई समुदाय के लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं, पेरिस टूरिस्ट ऑफिस इस मंदिर को फ्रांस का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर बताता है। इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है।
चर्चा में आई नारियल फोड़ने की रस्म
जश्न की शुरुआत मंदिर में पूजा-अर्चना और धार्मिक रस्मों के साथ हुई, जिसके बाद भक्त जुलूस के लिए सड़कों पर निकले। भगवान गणेश की मूर्ति को फूलों, मालाओं, नारियल और दूसरी पारंपरिक सजावटों से सजे एक रथ पर ले जाया गया। जुलूस के साथ गायक, डांसर और संगीतकार भी चल रहे थे। इस दौरान रास्ते में मिठाइयां, प्रसाद और ठंडे पेय बांटे गए।
इस इलाके में गणेश उत्सव कई दशकों से मनाया जा रहा है और यह पेरिस में हर साल होने वाला एक खास आयोजन बन गया है। इसमें न सिर्फ़ भक्त आते हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और हिंदू परंपराओं को देखने के इच्छुक पर्यटक भी शामिल होते हैं।
जुलूस के दौरान एक रस्म में भगवान के रथ के सामने नारियल फोड़े जाते हैं। इस साल के आयोजन के वीडियो में देखा गया कि जब रथ सड़कों से गुज़र रहा था तो भक्त ज़ोर से नारियल फोड़ रहे थे। पेरिस के कुछ निवासी भी जुलूस को देखने और तस्वीरें लेने के लिए रुकते हुए दिखे।
साफ़-सफ़ाई से लेकर इमिग्रेशन तक
ये क्लिप्स सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल गए और नारियल फोड़ने की रस्म चर्चा का विषय बन गई। कई यूज़र्स ने इस प्रथा पर सवाल उठाए और चिंता ज़ाहिर की कि इस तरह के सार्वजनिक जश्न से भारतीयों और विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय (डायस्पोरा) के बारे में लोगों की सोच पर क्या असर पड़ सकता है।
एक यूज़र ने लिखा, “भारतीय समुदाय के बुज़ुर्ग लोग (अंकल-आंटी) बस यह पक्का कर रहे हैं कि नौकरी के लिए सोचे जाने पर अगली पीढ़ी के भारतीयों से काफ़ी नफ़रत की जाए।” एक और यूज़र ने लिखा, “पहली प्रतिक्रिया तो थोड़ी हैरानी वाली थी, लेकिन… सबसे ज़रूरी बात यह है कि मुझे सच में उम्मीद है कि बाद में सफाई की गई होगी।”
एक अन्य ने कहा, “सर्वशक्तिमान ईश्वर में विश्वास रखना अच्छी बात है, लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि उन्होंने बाद में खुद सफाई की होगी।” इस बहस ने इमिग्रेशन (प्रवास) से जुड़े मुद्दे का भी रूप ले लिया। एक और यूज़र ने कहा, “हां, मुझे लगता है कि भविष्य में भारतीयों के और भी वीज़ा रद्द हो सकते हैं…” हालांकि, एक यूज़र ने बताया कि वे हर साल इस जुलूस में शामिल होते हैं और बाद में सड़कों की सफाई की जाती है।
एक यूज़र ने लिखा, “सभी को थोड़ा शांत होने की ज़रूरत है, पेरिस में सिटी काउंसिल के सहयोग से हर साल ऐसा होता है। जुलूस को सुचारू रूप से चलाने के लिए पुलिस, रेड क्रॉस और सफाई विभाग के लोग आयोजकों के साथ मिलकर काम करते हैं। इसमें दूर-दूर से लोग शामिल होते हैं और इसे देखना एक खूबसूरत अनुभव होता है।”
इस यूजर ने आगे कहा, “जुलूस के अगले दिन आपको पता भी नहीं चलेगा कि ऐसा कोई जश्न हुआ था। लोग ज़िम्मेदारी के साथ इसमें हिस्सा लेते हैं। इसलिए अपनी असुरक्षाओं को अपने तक ही रखें और इससे सीखें। आपका, पेरिस में रहने वाला एक भारतीय जो 5 साल से ज़्यादा समय से इसमें शामिल हो रहा है।” खैर, इस पर आपकी राय क्या है?
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वीडियो यहां देखें-
