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जेएनयू छात्र संघ की पूर्व उपाध्यक्ष शहला राशिद बोलीं- GST मतलब गो रक्षा टैक्स, यूजर्स ने दिया ऐसा जवाब

इस ट्वीट के बाद छात्र संघ की पूर्व उपाध्यक्ष विवादों में फंसती हुई नजर आ रही हैं।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष शहला राहिद ने एक जून से लागू हो रहे वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर एक ट्वीट किया है। (फोटो सोर्स फेसबुक)

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष शहला राहिद ने एक जून से लागू हो रहे वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट के बाद छात्र संघ की पूर्व उपाध्यक्ष विवादों में फंसती हुई नजर आ रही हैं। दरअसल उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘GST मतलब गो सुरक्षा टैक्स। क्या हम सरकार को इसके लिए टैक्स दे रहे हैं? क्या हम बेकाबू भीड़ द्वारा लोगों की हत्या करने के लिए टैक्स दे रहे हैं?’ हालांकि शहला राशिद के इस ट्वीट पर ट्विटर यूजर्स दो भागों बंटते हुए नजर आए। मोहम्मद इमरान सिद्दीकी ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘हमारे सारे टैक्स का पैसा आरएसएस और इसके आंतकियों के पास जाएगा।’ पीकेकृष्णा लिखते हैं, ‘भारत की आधी आबादी में आरएसएस है, इसलिए हम खुद की मर्जी से पे करते हैं।’ एक अन्य यूजर अनुज अवस्थी लिखते हैं, ‘बिल्कुल सही आधी आबादी मे आरएसएस हैं। और शहला ऐसे रो रही है जैसे सारा टैक्स यहीं देती हैं।’ वहीं एक अन्य यूजर वकार लिखते हैं, ‘आरएसएस का भारत में महत्व क्या है।’ छोटा गब्बर लिखते हैं, ‘यहां तो और भी पाकिस्तानी हैं।’ रवि प्रकाश शहला पर तंज कसते हुए लिखते हैं, ‘चिंता मत कीजिए जीएसटी सिर्फ भारतीयों के लिए हैं।’ दीपक लिखते हैं, ‘आप राष्ट्र का अपमान कर रही हैं।’

दूसरी तरफ तनवीर खान शहला के ट्वीट का समर्थन करते हुए लिखते हैं, ‘हम गाय गणतंत्र में रहने के लिए सरकार को टैक्स देते हैं।’ वहीं कुमार लिखते हैं, ‘जीएसटी मतलब गो से टाटा। अगर तुमने ऐसा नहीं किया तो हम सभी तुमसे बाटा की चप्पल से बात करेंगे।’ आमिर वानी भारतीय नागरिकों से अपील करते हुए लिखते हैं, ‘जागो भारतीय, ये समय अपनी आवाज को बुलंद करने का है।’ एक यूजर लिखते हैं, ‘क्या आप कश्मीर के बारे में बात कर रही हैं जहां उग्र भीड़ ने पुलिसकर्मी की हत्या कर दी।’

वहीं यो यो हनी सिंह सिंह लिखते हैं, ‘क्या मैं आपसे पूछ सकता हूं कि आप प्रत्यक्ष रूप से सरकार को कितना टैक्स देती हैं?’ वहीं नीतीश पटेल लिखते हैं, ‘गद्दार शहला आतंकवादी।’ पत्थर के सनम लिखते हैं, ‘तुम्हारे पिताजी पूरा पजामा नहीं पहन सकते वो मधुमक्खी का छत्ता लगा के देश को क्या देंगे।’

 

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