अंटार्कटिका से 40 साल पहले मिले एक छोटे से जीवाश्म को लंबे समय तक एक साधारण चट्टान का हिस्सा समझकर दराज में रख छोड़ दिया गया था। अब वैज्ञानिकों के लिए यह बड़ी खोज साबित हुआ है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जीवाश्म अंटार्कटिका में अब तक मिला पहला डायनासोर का जीवाश्म है।
यह जीवाश्म साल 1985 में अंटार्कटिका के जेम्स रॉस द्वीप पर मिला था। उस समय इसे खोजने वाली टीम यह नहीं समझ पाई कि यह किस जीव का अवशेष है। इसलिए इसे ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे (British Antarctic Survey) के कैम्ब्रिज स्थित भूवैज्ञानिक संग्रह में सुरक्षित रख दिया गया।
हाल ही में ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के संग्रह प्रबंधक डॉ. मार्क इवांस की नजर हजारों नमूनों के बीच इस जीवाश्म पर पड़ी। उन्होंने इसे देखकर शक जताया कि यह किसी समुद्री जीव का नहीं बल्कि डायनासोर का अवशेष हो सकता है। इसके बाद उन्होंने लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के जीवाश्म वैज्ञानिक प्रोफेसर पॉल बैरेट से इसकी जांच कराई।
जांच में पुष्टि हुई कि यह टाइटैनोसॉर (Titanosaur) नामक विशालकाय शाकाहारी डायनासोर की पूंछ की हड्डी (कशेरुका) है। टाइटैनोसॉर पृथ्वी पर रहने वाले सबसे बड़े डायनासोरों में गिने जाते हैं। हालांकि इस जीवाश्म के आधार पर वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अंटार्कटिका में रहने वाला यह टाइटैनोसॉर लगभग 7 मीटर (23 फीट) लंबा था। संभव है कि यह युवा डायनासोर रहा हो या फिर इस प्रजाति का अपेक्षाकृत छोटा सदस्य हो।
बीबीसी के अनुसार, यह डायनासोर करीब 8.2 करोड़ वर्ष पहले यानी लेट क्रेटेशियस काल में अंटार्कटिका में रहता था। उस समय अंटार्कटिका बर्फ से ढका नहीं था बल्कि वहां घने जंगल और हरियाली थी। शाकाहारी डायनासोरों के लिए यह एक अनुकूल वातावरण था।
प्रोफेसर पॉल बैरेट ने बीबीसी से कहा कि पहली नजर में यह जीवाश्म खास नहीं लगता लेकिन इसकी बनावट बेहद विशिष्ट है। उन्होंने बताया कि इसकी गेंद और सॉकेट जैसी संरचना साफ तौर पर टाइटैनोसॉर की पहचान कराती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज अंटार्कटिका के प्रागैतिहासिक इतिहास को समझने में बेहद अहम साबित होगी। आज जहां यह महाद्वीप बर्फ से ढका और जीवन के लिए कठिन माना जाता है। वहीं करोड़ों साल पहले यहां विशाल डायनासोर और घने जंगल मौजूद थे। यह खोज इस बात का भी महत्वपूर्ण प्रमाण है कि अंटार्कटिका कभी जीव-जंतुओं से भरपूर और रहने योग्य क्षेत्र हुआ करता था।
