हरियाणा में एक किसान परिवार के चार भाई-बहनों ने एक साथ खाकी वर्दी पहनकर इतिहास रच दिया है। कहते हैं जब माता-पिता के संस्कार, बच्चों की मेहनत और एक परिवार का सपना साथ चलता है तो सफलता भी एक साथ कदम चूमती है।

भिवानी जिले के तौशाम तहसील के गांव सण्डवा के किसान अत्तर सिंह के चारों बेटे-बेटियों ने सरकारी नौकरी हासिल कर पूरे परिवार का नाम रोशन किया है। इनमें तीन भाई-बहन दिल्ली पुलिस, हरियाणा पुलिस और चंडीगढ़ पुलिस में कांस्टेबल हैं, जबकि चौथा रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में तैनात हैं।

परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण होने के बावजूद माता-पिता ने बच्चों की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। आज चारों भाई-बहनों की सफलता यह साबित करती है कि मेहनत, लगन और माता-पिता के त्याग से कोई भी सपना असंभव नहीं होता।

लोगों का कहना है कि यह मेहनत और माता-पिता के त्याग की शानदार मिसाल है। किसान के चारों बच्चों ने अपनी मेहनत के दम पर सरकारी नौकरी हासिल की है। आज एक ही घर से चार पुलिस कांस्टेबल देश की सेवा कर रहे हैं। जब गांव के लोगों ने चारों भाई-बहन को एक साथ पुलिस की वर्दी में देखा तो उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया, वहीं माता-पिता सहित परिवार के लोग भावुक हो गए, यह पल सभी के लिए यादगार बन गया।

सफलता की कहानी-

चारों भाई-बहनों ने स्कूल की पढ़ाई गांव से की थी। इसके बाद कॉलेज के साथ-साथ वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लग गए थे। लगातार मेहनत और सही योजना की वजह से उन्हें सफलता मिलती चली गई। इनकी कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा है, कुछ करने की ठान लो तो क्या गांव क्या शहर… सफलता जरूर मिलती है। इनके बड़े पांचवें भाई श्याम सुंदर राजस्थान के सीकर स्थित प्रिंस एकेडमी में गणित के शिक्षक हैं। घर के आयोजन में जब पहली बार भाई-बहन वर्दी में पहुंचे तो गांव में चर्चा होने लगी। यह पल परिवार के लिए खास बन गया।

बड़ी बेटी सुदेश- चंडीगढ़ पुलिस में कांस्‍टेबल के रूप में भर्ती
उर्मिला- रेलवे सुरक्षा बल में कांस्‍टेबल में भर्ती
मोनिका- दिल्ली पुलिस कांस्‍टेबल में भर्ती
भाई अंकित- हरियाणा पुलिस में कांस्‍टेबल में भर्ती

बता दें कि पिता अत्‍तर सिंह और मां राजवंती देवी ने बच्चों की सफलता के लिए कड़ी मेहनत की और उकनी पढ़ाई को लेकर हमेशा सवाल-जवाब करते रहे। पिता को 12वीं पास है मगर मां ने स्कूली शिक्षा नहीं। मां की कही बात और अनुशासन को बच्चों ने माता-पिता के मंत्र को अपना लिया और सफलता की कहानी लिख दी। आज परिवार सहित पूरे गांव को इन भाई-बहनों पर गर्व है।

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