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रोहिंग्‍या मुस्लिमों पर भड़कीं तस्‍लीमा नसरीन- दूसरे जुल्‍म करें तो रोते हो, खुद मुस्लिम करें तो कुछ नहीं

निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने मुस्लिम समुदाय के कथित तौर पर दोहरे रवैए पर निशाना साधा है।
निर्वासित बांग्लादेशी लेखक तस्लीमा नसरीन। (फाइल फोटो)

निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने मुस्लिम समुदाय के कथित तौर पर दोहरे रवैए पर निशाना साधा है। उन्होंने मुस्लिमों पर तंज कसते हुए उनपर अपने ही लोगों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगयाा है। बांग्लादेशी लेखिका ने ट्वीट कर लिखा, ‘मुस्लिम उन मुसलमानों के लिए रोते हैं जो गैर मुस्लिमों के जुल्म का शिकार होते हैं। मुस्लिम तब नहीं रोते जब मुस्लिमों पर मुस्लिमों द्वारा ही जुल्म किया जाता है।’ गौरतलब है कि तस्लीमा नसरीन ने बिना नाम लिए उन मुस्लिमों पर साधा है जो म्यामांर में हिंसा का शिकार हुए रोहिंगिया मुस्लिम पर बोल रहे हैं। और हिंसा के प्रति अपना विरोध जाहिर कर रहे हैं। जबकि इन्हीं लोगों को सीरिया, इराक में मुस्लिमों द्वारा मुस्लिमों को मारने का विरोध करते हुए नहीं देखा जाता।

दूसरी तरफ लेखिका तस्लीमा नसरीन के ट्वीट पर कई यूजर्स ने अनपी प्रतिक्रियाएं दी हैं। ट्विटर यूजर कुंदन कुमार सिंह लिखते हैं, ‘ऐसे लोग अन्य धर्मों के लिए भी अपना विरोध दर्ज नहीं कराते जिनपर मुस्लिम ही जुल्म करते हैं।’ अंकुर गुप्ता लिखते हैं, ‘मुस्लिम उन गैर मुस्लिमों के लिए कभी नहीं रोते जो मुस्लिमों के ही जुल्म का शिकार होते हैं। लेकिन हम गैर मुस्लिमों से उनके लिए रोनी की उम्मीद कर सकते हैं।’ सागर रामचंद्रण लिखते हैं, ‘मुस्लिम हमेशा हिंदू धर्म में जातिवाद- धर्मपरिवर्तन की शिकायत करते हैं लेकिन वो अभी भी अरब देशों की तरह व्यवहार करते हैं।’

वहीं समसुल हुदा कासमी लिखते हैं, ‘आप यहां मेहमान के रूप में रह रही हैं। आपको विवादित बयान नहीं देने चाहिए।’ पांडे लिखते हैं, ‘यहीं कारण है कि दुनिया में धीरे-धीरे लोग ऐसे लोगों को अनदेखा करना शुरू कर देते हैं।’ अनिमेष आंचलिया लिखते हैं, ‘100 फिसदी सही। मोहतरमा आप उन चुनिंदा मुस्लिम मे से है जो इस सत्य को स्वीकार करती हैं और इससे बढ़कर इस बात को बोलने कि हिम्मत रखती हैं।’ निपुण लिखते हैं, ‘धर्म का रंग अंधा होता है।’

 

 

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