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वीडियो: आरक्षण पर बहस में दलित चिंतक से बोले पत्रकार- अगर तुम एंकर नहीं बन पाए तो मेरी गलती?

प्रोफेसर गंगा सहाय ने कहा,'' क्या आप किसी ऐसे जज को जानते हैं जो हमारे समुदाय से आता हो? क्या आप किसी वाइस चासंलर का नाम बता सकते हैं जो हमारे समुदाय से आता हो? आप क्या किसी न्यूज एंकर का नाम बता सकते हैं जो हमारे समुदाय से आता हो?

कार्यक्रम के दौरान बहस करते पैनलिस्‍ट। फोटो- यू ट्यूब (स्‍क्रीनशॉट)

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आरक्षण के मुद्दे पर अपने भाषण में हाल ही में चर्चा की थी। इसी विषय पर चर्चा करने के लिए समाचार चैनल आज तक पर दलित समुदाय से आने वाले प्रोफेसर गंगा सहाय मीणा को बतौर पैनलिस्ट बुलाया गया था। चैनल पर चर्चा के दौरान प्रोफेसर मीणा ने ये सवाल उठाया कि आखिर कोई न्यूज एंकर उनके समुदाय का क्यों नहीं है? इस सवाल पर उनकी बहस कार्यक्रम के एंकर रोहित सरदाना से हो गई।

प्रोफेसर गंगासहाय मीणा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि संविधान निर्माताओं ने 10 साल के राजनीतिक आरक्षण की बात कही और 10 साल के बाद उसके रिव्यू की भी बात कही थी। ये देखा जाना चाहिए कि जो वंचित तबकों से सांसद और विधायक आते हैं, उन्होंने समाज का उचित प्रतिनिधित्व किया है या नहीं किया है। लेकिन ये एक तरह का ईर्ष्या भाव है कि कल को वंचित तबके से आने वाला कोई शख्स अगर आपके बगल में आकर बैठने लगता है तो कुछ लोगों को समस्या होने लगती है।

अपनी बात के पक्ष में प्रोफेसर गंगा सहाय ने कहा,” क्या आप किसी ऐसे जज को जानते हैं जो हमारे समुदाय से आता हो? क्या आप किसी वाइस चासंलर का नाम बता सकते हैं जो हमारे समुदाय से आता हो? आप क्या किसी न्यूज एंकर का नाम बता सकते हैं जो हमारे समुदाय से आता हो? या फिर उन पदों पर जो शीर्ष पर हैं उनमें से कितने पदों पर हमारे समुदाय के लोग बैठे हैं?

प्रोफेसर गंगा सहाय के बयान पर कार्यक्रम के एंकर रोहित सरदाना ने पलटवार करते हुए कहा,” रोहित सरदाना से पहले आपने कितने मोहित सरदाना, प्रदीप सरदाना और विजय सरदाना नाम के एंकर देखे। या फिर मैं ये समझूं कि मेरे समाज के लोगों को दबाया गया और उन्हें एंकर नहीं बनने दिया गया। या फिर मैं ये जानूं कि वहां पर किसी ने सोचा ही नहीं कि मुझे न्यूज एंकर बनना है।

इस पर प्रोफेसर गंगा सहाय ने कहा कि मीणा समाज के लोग इतने भोले हैं कि मीणा टाइटल लगाते हैं जबकि सवर्ण समाज के लोग अलग—अलग टाइटल लगाते हैं। मैं आपको ऐसे चैनलों की पूरी लिस्ट दे सकता हूं जहां पर एंकर से लेकर ऊपर और नीचे तक सारे लोग एक ही जा​ति विशेष से संबंध रखते हैं। इसलिए अगर कोई वंचित तबके का व्यक्ति बराबर बैठता है तो लोगों को समस्या होती है।

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