शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बेटी नैमिषा प्रधान ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डीएक्टिवेट कर दिया है। वे विदेश से डिग्री लेने को लेकर वे सीजेपी प्रदर्शनकारियों के निशाने पर थीं। उन्हें ट्रोल किया जा रहा था। नैमिषा के पिता को परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा था और यूज़र्स ने उन्हें भी विदेश में पढ़ाई करने को लेकर निशाना बनाया। इस घटना ने उस बहस को और बढ़ा दिया है जिसमें उन रिश्तेदारों के साथ ऑनलाइन दुर्व्यवहार पर चर्चा हो रही है, जो किसी सार्वजनिक पद पर नहीं हैं। जनसत्ता ने क्रॉस चेक किया तो अब कोई अकाउंट मौजूद नहीं है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बेटी नैमिषा प्रधान ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डीएक्टिवेट कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया जब प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच उन्हें ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर आलोचना का दायरा राजनीतिक बहस से बढ़कर मंत्री के परिवार के सदस्यों तक पहुंच गया था।
टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के सोशल मीडिया पेजों पर भी कमेंट्स की भरमार
कुछ यूज़र्स ने टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के सोशल मीडिया पेजों पर भी कमेंट किए, जिसमें उन्होंने उनकी विदेश में हुई पढ़ाई पर सवाल उठाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस हफ़्ते की शुरुआत में संसद की ओर मार्च कर रहे छात्र प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई के बाद आलोचना और तेज़ हो गई। प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा पेपर लीक के मामले में जवाबदेही और शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे थे।
नैमिषा प्रधान ने 2023 में अमेरिका के मैसाचुसेट्स के मेडफोर्ड में स्थित टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के फ्लेचर स्कूल से मास्टर ऑफ़ लॉज़ (LLM) की पढ़ाई पूरी की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्रेजुएशन के बाद वह सीनियर एसोसिएट के तौर पर US-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फ़ोरम (USISPF) से जुड़ीं।
विदेश से क्यों ली शिक्षा?
सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में सवाल उठाया गया कि शिक्षा मंत्री की बेटी ने विदेश में उच्च शिक्षा क्यों ली, कुछ लोगों ने तर्क दिया कि यह भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में आत्मविश्वास की कमी को दर्शाता है। साथ ही कई उपयोगकर्ताओं ने सार्वजनिक पद पर नहीं रहने वाले परिवार के सदस्य को ऑनलाइन निशाना बनाने की निंदा की और तर्क दिया कि राजनीतिक आलोचना उनके रिश्तेदारों के बजाय निर्वाचित प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं पर केंद्रित रहनी चाहिए।
यह विवाद छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर धर्मेंद्र प्रधान पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है, जिसमें विपक्षी दलों ने परीक्षा संबंधी मुद्दों से निपटने के लिए उनके इस्तीफे की मांग की। केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर छात्रों की चिंताओं का राजनीतिकरण करने और इस मुद्दे पर संसद को बाधित करने का आरोप लगाते हुए आलोचना को खारिज कर दिया है।
इस घटना ने डिजिटल युग में राजनीतिक आलोचना की सीमाओं पर बहस को फिर से छेड़ दिया है। हालांकि सार्वजनिक हस्तियों को अक्सर कड़ी जांच-पड़ताल का सामना करना पड़ता है, लेकिन साइबर विशेषज्ञों और डिजिटल अधिकारों के पैरोकारों ने बार-बार चेतावनी दी है कि उन परिवार के सदस्यों के खिलाफ ऑनलाइन दुर्व्यवहार न किया जाए जो सार्वजनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल नहीं हैं। उन्होंने आगाह किया है कि ऐसे अभियान ‘टारगेटेड ऑनलाइन उत्पीड़न’ (किसी खास व्यक्ति को निशाना बनाकर ऑनलाइन परेशान करने) की श्रेणी में आ सकते हैं।
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