दिल्ली बस रेप-मर्डर केस में पुलिस ने साकेत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक लगभग 47 किलोमीटर की यात्रा के दौरान एक चलती हुई स्लीपर बस में 17 साल की लड़की के साथ रेप के आरोपी दो लोगों के खिलाफ बायोलॉजिकल सैंपल (जैसे वीर्य और बाल) अहम सबूत के तौर पर सामने आए हैं।

मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने इस महीने की शुरुआत में 398 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी और कोर्ट ने पिछले हफ़्ते इसका संज्ञान लिया।

पुलिस को दिए अपने बयान के मुताबिक, लड़की ने बस के अंदर मौजूद लोगों से कहा था कि उसे नोएडा जाना है और उसे बताया गया कि बस उसी तरफ़ जा रही है। बस में चढ़ने के बाद उसे पता चला कि उसमें कोई और यात्री नहीं है और उसने उतरने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि कंडक्टर ने उसे खींचकर वापस अंदर कर लिया।

पुलिस ने बताया है कि कथित यौन उत्पीड़न तब हुआ जब बस दिल्ली की ओर जा रही थी। रिपोर्ट के अनुसार, लड़की को कश्मीरी गेट पर छोड़ दिया गया था और वह स्थानीय पुलिस स्टेशन पहुंची।

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पुलिस ने कहा कि शिकायत की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए पीड़िता की मेडिकल जांच कराई गई और बिना किसी अधिकार क्षेत्र संबंधी देरी के मामला दर्ज किया गया। CCTV फुटेज की मदद से उन्होंने बस को तिमारपुर के एक पार्किंग एरिया में ढूंढ़ निकाला और चार घंटे के अंदर ही बस ड्राइवर कुलदीप (39) और कंडक्टर संदीप (26) को गिरफ़्तार कर लिया; ये दोनों कानपुर के रहने वाले थे।

जांच में कई गड़बड़ियां सामने आईं

पुलिस की जांच में ग्रेटर नोएडा, नोएडा और दिल्ली से होते हुए बस का रूट पता चला और यह भी पता चला कि यात्रा के दौरान सुरक्षा या नियमों के पालन की जांच के लिए गाड़ी को कहीं नहीं रोका गया था। जांच करने वालों को पता चला कि बस पर ट्रैफिक के 11 चालान बकाया थे जिनमें से सात जुलाई में जारी किए गए थे , ये चालान स्पीड-लिमिट डिवाइस और परमिट के नियमों को तोड़ने से जुड़े थे।

पुलिस को यह भी पता चला कि इन दोनों लोगों को बिना पुलिस वेरिफिकेशन के काम पर रखा गया था। बस का CCTV कैमरा भी खराब हालत में मिला, जबकि खिड़कियों पर मोटे पर्दे लगे हुए थे। जांच करने वालों ने यह भी पता लगाने की कोशिश की कि घटना के समय GPS या व्हीकल-ट्रैकिंग सिस्टम और पैनिक बटन जैसे सुरक्षा उपकरण लगे थे या नहीं और वे काम कर रहे थे या नहीं। जांच के दौरान लिए गए बायोलॉजिकल सैंपल जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजे गए, और पुलिस ने जल्द रिपोर्ट मांगी क्योंकि वे केस को ट्रायल के लिए तैयार कर रहे थे।

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