प्राइवेट सेक्टर की नौकरी कब चली जाए ये कोई नहीं जानता, आए दिन ऐसे मामले सामने आते रहते हैं जहां प्राइवेट नौकरी करने वाले कर्मचारियों को बिना किसी नोटिस के जॉब से निकाल दिया जाता है। कॉर्पोरेट सेक्टर में एक से एक कर्मचारियों की ऐसी कहानी है जहां बिना कुछ कहे उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। यह सिचुएशन जब किसी के सामने आती है तो व्यक्ति दूसरे विकल्पों पर विचार करना शुरू कर देता है क्योंकि नौकरी चले जाने के बाद आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है और उसे दूर करने के लिए कुछ न कुछ काम तो करना पड़ता है। एक ऐसी ही कहानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन के जरिए पता चली है जिसमें एक 56 साल के व्यक्ति की नौकरी चली गई और उसके बाद उन्होंने पोर्टर डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया।
लिंक्डइन यूजर ने शेयर की स्टोरी
यह कहानी लिंक्डइन पर सोशल एंटरप्रेन्योर किरण वर्मा ने शेयर की है जो अब काफी वायरल हो रही है। इस कहानी को शेयर करने वाले यूजर ने बताया है कि उन्होंने नोएडा में एक अर्जेंट लेटर भेजने के लिए पोर्टर डिलीवरी बुक की थी। उनके पास जो डिलीवरी मैन आया वह एक बुजुर्ग व्यक्ति थे जिनसे उन्होंने बातचीत की तो उनका अनुभव हैरान करने वाला था। डिलीवरी पार्टनर के साथ उनकी बातचीत यादगार बन गई।
14 साल के बाद निकाल दिया नौकरी से
किरण वर्मा के मुताबिक, नोएडा में जब उन्होंने एक पार्सल को भेजने के लिए पोर्टर सर्विस को बुक किया तो उनके पास 56 साल का मनोज नाम का व्यक्ति पार्सल रिसीव करने आया। उस डिलीवरी बॉय को देखकर किरण वर्मा थोड़ी हैरान हुईं और उन्होंने फिर उस डिलीवरी पार्टनर से बातचीत की जिसमें पता चला कि 14 साल कॉर्पोरेट सेक्टर में जॉब करने के बाद उनकी नौकरी चली गई, जिसके बाद मैंने डिलीवरी पार्टनर का काम शुरू किया। मनोज की यह कहानी देश की गिग इकॉनमी की असलियत बयां करती है।
मनोज ने क्यों शुरू किया डिलीवरी का काम
किरण वर्मा के मुताबिक, जब मेरा पार्सल लेने के लिए मनोज नाम का वह व्यक्ति सीढ़ियां चढ़कर ऊपर आया तो मैंने उसे कुछ परेशान देखा और वह परेशान सिर्फ इसलिए था कि उसे पैकेज के लिए सीढ़ियां चढ़नी पढ़ी थीं, फिर मैंने उनसे बातचीत की तो उन्होंने बताया कि आज काम ही नहीं था, काम के लिए इंतजार कर रहा था।
मनोज ने किरण वर्मा को बताया कि वह 2023 तक टाटा AIA लाइफ इंश्योरेंस के एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट में काम करते थे और उन्होंने वहां 14 साल काम किया था। नौकरी से निकाले जाने के बाद उन्हें नई नौकरी ढूंढने में काफी मुश्किल हुई, उनकी हेल्थ और उनकी उम्र नई नौकरी में बाधा बनी, इसीलिए उन्होंने गुजारा करने के लिए डिलीवरी का काम शुरू किया।
कॉर्पोरेट की हकीकत बताती यह कहानी
मनोज ने बताया कि कॉर्पोरेट सेक्टर में आपकी बढ़ती उम्र आपके नौकरी के अवसरों को खत्म करती जाती है। मनोज ने अनुभवी कर्मचारियों की तुलना करी पत्ते से करते हुए कहा कि जब कोई सब्जी बनाई जाती है तो करी पत्ता सबसे पहले डलता है और जब सब्जी खाते हैं तो सबसे पहले करी पत्ता को ही सब्जी से बाहर करते हैं। किरण वर्मा ने अपनी पोस्ट में यह भी साफ किया है कि मैं इस बात को भी मानती हूं कि कंपनियां उस कर्मचारी को भी निकाल देती हैं जिसका परफॉर्मेंस अच्छा नहीं होता।
किरण वर्मा की यह सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से वायरल हुई और लोगों ने अपने-अपने अनुभव भी शेयर करने शुरू कर दिए। भले ही मनोज की नौकरी जाने का असली कुछ और भी हो सकता है, लेकिन ऐसे मामले बहुत हैं जो आए दिन कॉर्पोरेट की असलियत को बयां करती है। किरण वर्मा की वायरल पोस्ट पर कई प्रोफेशनल्स और रिक्रूटर्स के रिएक्शन आए। पोर्टर ने भी पब्लिकली जवाब दिया और किरण वर्मा को इस स्टोरी को शेयर करने के लिए धन्यवाद किया। हालांकि उस कंपनी का कोई रिएक्शन नहीं आया जिसने मनोज को निकाला था।
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Disclaimer: यह कहानी लिंक्डइन पर वायरल हुई एक पोस्ट और उसके बाद लोगों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। जनसत्ता ने पोस्ट में बताए गए लोगों के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है।
