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कांग्रेस नेत्री ने समझाया तेल का गणित तो बोले फिल्ममेकर- 2014 से पहले ये काम पत्रकारों का होता था…

सुप्रिया श्रीनेत के वीडियो को शेयर करते हुए फिल्ममेकर विनोद कापड़ी ने लिखा कि ‘2014 से पहले ये काम पत्रकारों, मीडिया, संपादकों का होता था।’

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पीएम नरेन्द्र मोदी (फोटो सोर्स: @narendramodi)

भारत सरकार ने उत्पाद शुल्क कम करते हुए तेल के दाम घटा दिए हैं। इसे लोगों के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। बीजेपी के नेता तेल के दाम कम किए जाने पर प्रधानमंत्री को बधाई दे रहे हैं तो कांग्रेस के नेता सवाल उठा रहे हैं। सुप्रिया श्रीनेत तो एक वीडियो बनाकर ये समझाने की कोशिश की है कि सरकार ने पेट्रोल के दाम कम तो कर दिए लेकिन आज भी हम वहीं खड़े हैं जहां दो महीने पहले खड़े थे।

वीडियो में सुप्रिया श्रीनेत बताती हैं कि आज से दो महीने पहले तेल के दाम क्या थे? और इन दो महीनों के भीतर तेल के दाम कितने बढ़े। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि मोदी सरकार ने तेल के दाम घटाने के बाद भी हमें वहीं पहुंचाया है जहां हम दो महीने पहले थे। मतलब जिस रेट पर तेल दो महीने पहले मिलता है, वही रेट अभी भी है। इतना ही नहीं सुप्रिया श्रीनेत ने बताया कि सरकार, तेल पर कई तरह के टैक्स वसूलती है। जिस टैक्स की कटौती को लेकर मोदी सरकार की वाहवाही हो रहे हैं, उस टैक्स के पैसे को केंद्र सरकार, राज्य सरकार के साथ साझा करती है।

सुप्रिया श्रीनेत के वीडियो को शेयर करते हुए फिल्ममेकर विनोद कापड़ी ने लिखा कि ‘2014 से पहले ये काम पत्रकारों, मीडिया, संपादकों का होता था।’ सोशल मीडिया पर लोग इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। प्रभू द्विवेदी नाम के यूजर ने लिखा कि ‘एक बात बताओ, कांग्रेस इतनी ही अच्छी थी 2014 में हारी क्यों? और हारी तो ठीक पर अब तक जीती क्यों नहीं?’ भरत रावत नाम के यूजर ने लिखा कि ‘तुम दोनों ये बताओ 2003-2004 में क्या रेट था और 2013-2014 में क्या रेट था? तब तो बोलते थे के पैसे पेड़ पर नहीं लगते, अभी इतना संकट होने के बाद भी संभला हुआ है।’

एक यूजर ने सवाल पूछा, ‘क्या आपको  लगता है कि अब पत्रकार/संपादक जैसा कोई बचा है?’ सरफराज अहमद नाम के यूजर ने लिखा कि ‘ये बात सच है लेकिन ये भी बात सच है आज के व्हाट्सएप युनिवर्सिटी के दौर में हर इंसान और विपक्षी प्रवक्ताओं को पत्रकार बनना होगा, तभी सच सामने आ सकता है।’ संजय नाम के यूजर ने लिखा कि तो ‘अब क्या किसी ने ये काम करने से मना किया है? वीडियो बनाइये और डालिये यूट्यूब पर या फिर अपना अखबार छाप कर बेचिए।’

आर्ची मिश्रा ने लिखा कि ‘जब मीडिया वाले नही करेंगे तो ऐसा ही कुछ करना पड़ेगा सर अब, सुप्रिया श्रीनेत जी ये काफी अच्छी पहल है, आप जारी रखिए।’ रॉकी सिंह नाम के यूजर ने लिखा कि ‘वह पत्रकार ही थी पहले लेकिन पत्रकारिता करते-करते कांग्रेस में चली गईं।’ संतोष निषाद नाम के यूजर ने लिखा कि ‘2014 से पहले मीडिया वाले को बोलने की आजादी थी, अब वह आजादी संविधान से छीन ली गई है इसीलिए मीडिया वाले अभी कुछ नहीं बोलते हैं।’

बता दें कि वीडियो जारी कर सुप्रिया श्रीनेत ने बताया है कि 2014 में जब कांग्रेस की सरकार थी, उस वक्त देश में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 9.48 रूपये प्रति लीटर और डीजल पर 3.56 पैसे प्रति लीटर था जिसे बढ़ाकर सरकार ने 27.80 रूपये और 21.80 रूपये कर दिया है। अब कटौती के बाद भी पेट्रोल पर उत्पाद शुक्ल 19.90 और डीजल पर 15.80 प्रति लीटर है।  

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