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बागी हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के मंत्री, जनता से बोले- भाजपा विधायकों के मुंह पोत दो कालिख

प्रतापगढ़ के कोहडौर बाजार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा विधायक और मंत्री राजेंद्र प्रताप ने जनता से सवाल जवाब के दौरान ये बात कही।

Author Updated: July 3, 2017 6:56 PM
राजभर पहले भी अपने बयानों की वजह से कई बार विवादों के घेरे में आ चुके हैं। (फोटो सोर्स: वीडियो स्क्रीन शॉट)

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्य नाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह ने क्षेत्र में विकास ना करने पर सूबे में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इंडिया टुडे टीवी चैनल के अनुसार उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा, ‘भाजपा-अपना दल विधायकों, सांसदों के मुंह पर कालिख पोत दो।’ प्रतापगढ़ के कोहडौर बाजार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा विधायक और मंत्री राजेंद्र प्रताप ने जनता से सवाल जवाब के दौरान कहा, ‘मैंने सांसद और विधायकों से कहा था कि वो मंगरौरा का विकास करें। अगर अगले 15 दिनों में ऐसा नहीं होता तो जनता विश्वनाथंगज से अपना दल विधायक आरके वर्मा, प्रतापगढ़ सदर से अपना दल विधायक संगम लाल गुप्ता और रानीगंज से भाजपा विधायक धीरज ओझा के मुंह पर कालिख पोत दें।’ इस दौरान आक्रोशित मंत्री ने यहां तक कह डाला की वो अगला विधानसभा चुनाव प्रतापगढ़ सदर की सीट से लड़ेंगे। बता दि वर्तमान में यहां से एनडीए की सहयोगी अपना दल के संगम लाल गुप्ता विधायक हैं। जनसभा को संबोधित करते हुए योगी के मंत्री ने आगे कहा कि अपना दल के सांसद हरिबंश सिंह की कोहड़ौर क्षेत्र में जमानत तक नहीं बचेगी।

वहीं बीते दिनों तीनों विधायक और सांसद ने सीएम योगी से मुलाकात कर मोती सिंह की शिकायत की थी। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि मोती सिंह बिना बताए उनके क्षेत्र में जनसभाएं करते हैं और पार्टी विरोधी बयान देते हैं। वहीं जिले की प्रभारी स्वाती सिंह की उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी ये तीनों विधायक नहीं पहुंचे थे जिसमें सरकारी की 100 दिन उपलब्धि गिनाई गई थी। विधायक का कहना है कि उन्हें न्योता ही नहीं दिया गया। बता दें कि समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्य में पिछड़ा कल्याण वर्ग मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने चार जुलाई को सरकार के खिलाफ धरना देने की भी धमकी दी है। सूत्रों के मुताबिक, राजभर योगी सरकार से इसलिए भी नाराज हैं क्योंकि उन्होंने गाजीपुर के जिलाधिकारी को हटाने की मांग की थी, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया। मंत्री ने आरोप लगाया था कि डीएम भ्रष्टाचारी है और समाजवादी पार्टी के एजेंट के रूप में काम कर रहा है।

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