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क्रिसमस, न्यू ईयर पर भी बंद हो पटाखे, सिर्फ हिन्दुओं को मत करो टारगेट- BJP प्रवक्ता

बग्गा ने साफ कहा कि अगर दिल्ली में आतिशबाजी करना खतरनाक है तो क्रिसमस औऱ न्यू ईयर समेत पूरे साल के रोक लगनी चाहिए इस तरह एक धर्म मतलब हिन्दुओं को ही टारगेट नहीं बनाना चाहिए।

Author Updated: October 11, 2017 10:00 AM
तेजिंदर पाल सिंह बग्गा दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने फैसले में दिवाली के दौरान दिल्ली और एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी है। इस फैसले को लेकर कई हिन्दू संगठन अपनी नाराजगी जता चुके हैं। हालांकि कोर्ट ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए ये फैसला सुनाया है लेकिन फिर भी दिवाली से 10 दिन पहले आए इस फैसले को गले से उतारना आसान नहीं दिख रहा है। दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता और अपनी आक्रमक तेवरों के लिए जाने वाले तेजिंदर सिंह भग्गा ने एक टीवी डिबेट में बैठकर कोर्ट के फैसले को स्वीकार तो किया लेकिन बेहद घुमाफिराकर । बग्गा ने साफ कहा कि अगर दिल्ली में आतिशबाजी करना खतरनाक है तो क्रिसमस औऱ न्यू ईयर समेत पूरे साल के रोक लगनी चाहिए इस तरह एक धर्म मतलब हिन्दुओं को ही टारगेट नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगर ऐसा होता है तभी इस फैसले पर सवाल है। साथ ही दिवाली से 10 पहले लाखों रुपए के पटाखें खरीद चुके दुकानदारों को होने वाले आर्थिक नुकसान पर उन्होंने सवाल उठाए।

 

 

इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री और भंडारण पर रोक लगाने वाले नवंबर 2016 के आदेश को बरकरार रखते हुए यह फैसला सुनाया।  अदालत ने कहा कि दिल्ली एवं एनसीआर में पटाखों की बिक्री और भंडारण पर प्रतिबंध हटाने का 12 सितंबर 2017 का आदेश एक नवंबर से दोबारा लागू होगा यानी एक नवंबर से दोबारा पटाखे बिक सकेंगे। न्यायमूर्ति सीकरी ने पटाखों से होने वाले दुष्प्रभावों का हवाला देते हुए कहा, “इस दौरान हवा का स्तर खतरनाक रूप से बिगड़ जाता है और शहर में दम घूंटने जैसी स्थिति पैदा हो जाती है जिससे स्कूलों को बंद करना पड़ता है।

इसके बाद अधिकारियों को स्वास्थ्य आपातकाल स्थिति में तत्काल कई उपाय करने पड़ते हैं।” न्यायालय ने कहा कि यह स्थिति पिछले वर्ष नवंबर में दिवाली के बाद सुबह पैदा हुई थी और इस वजह से 11 नवंबर 2016 को इस संबंध में आदेश पारित करना पड़ा था। न्यायालय के आदेश के अनुसार, “यह आदेश पिछले वर्ष दिया गया था लेकिन इस आदेश का असर और प्रभाव अभी देखा जाना बाकी है।”

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