मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से अनोखी घटना सामने आई है, यहां बाघिन ने एक चरवाहे पर हमला कर दिया, लेकिन इस समय शख्स की भैंसों ने उस पर धावा बोलकर उसे खदेड़ दिया और अपने मालिक की जान बचा ली। इस हमले में शख्स के हाथ में चोट आई है मगर भैंसों के कारण उसकी जान बच गई।
घटना के बारे में बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि पनपथा के कोर क्षेत्र में रामनरेश सिंह (36) अपने मवेशियों की तलाश कर रहे थे तभी अचानक उनका सामना अपने शावकों के साथ घूम रही एक बाघिन से हो गया। वे बाघिन को देखकर घबरा गए।
बाघिन को भैंसों ने जंगल की तरफ खदेड़ा
उन्होंने आगे बताया कि बाघिन ने सिंह पर हमला कर दिया जिसमें उसके हाथ में चोटें आईं। बाघिन सिंह को खींचकर ले जाने का कोशिश कर रही थी, तभी उनकी भैंसें बाघिन की ओर दौड़ पड़ीं और उसे जंगल की ओर खदेड़ दिया। सोशल मीडिया पर मालिक और भैसों के बीच इस गहरे रिश्ते की चर्चा हो रही है।
‘मेरी भैंसों ने मेरी जान बचाई’
सिंह ने मीडया से कहा, ”मेरी भैंसों ने मेरी जान बचाई। अगर वे वहां नहीं होतीं तो मैं जिंदा नहीं बचता।” उन्होंने आगे बताया कि बाघिन ने उन्हें पकड़ लिया था और उस समय उन्हें लगा था कि अब उनकी जान नहीं बचेगी। सिंह ने कहा, ”मुझे लगा कि मेरी जिंदगी खत्म हो गई है। अगर भैंसों ने मुझे नहीं बचाया होता तो बाघिन मुझे खींचकर ले जाती।”
घटना के बाद सिंह के साथियों ने उन्हें जंगल में घायल अवस्था में देखा। उन्होंने उनके हाथ पर पट्टी बांधी और बह रहे खून रोकने में मदद की और फिर बाद में वनकर्मी उन्हें अस्पताल ले गए। सहाय ने बताया कि सिंह को तत्काल मानपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत सामान्य है। वन विभाग ने उन्हें तत्काल सहायता के तौर पर 3,000 रुपये दिए हैं। घटना के बाद इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है।
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आइए आपको ‘गंगाराम’ मगरमच्छ की पूरी कहानी सुनाते हैं… छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में एक गांव है- बावा मोहतरा। यहां के तालाब में एक मगरमच्छ रहता था। जिसे गांव वाले प्यार से गंगाराम पुकारते थे। यह मगरमच्छ सिर्फ एक जंगली जीव नहीं था, बल्कि गांव के लोगों के परिवार का हिस्सा माना जाता था। करीब 130 साल तक तालाब में रहने वाले इस मगरमच्छ ने ऐसी मिसाल कायम की, जिसकी चर्चा आज भी होती है। और अधिक पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
