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देखिए ‘पद्मावती’ विवाद में ये क्या बोल गए सुनील शेट्टी, वायरल हो रहा है वीडियो

बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने 'पद्मावती' विवाद पर कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि इस फिल्म में ऐसा कुछ होगा जिसे देखकर लोगों को खराब लगे।
पद्मावती विवाद पर सुनील शेट्टी ने रखी अपनी राय (एक्सप्रेस फोटो)

संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर हो रहे विवाद पर अब बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा है कि इस फिल्म में उन्हें नहीं लगता कि ऐसा कुछ होगा जिसे देखकर लोगों को खराब लगे। इसके साथ ही उन्होंने यह तक कह डाला कि एक बार इस फिल्म को एक बार उन लोगों को दिखा दिया जाना चाहिए जो इसका विरोध कर रहे हैं। वहीं उनका यह भी कहना है कि फिल्म को लेकर आखिरी फैसला तो सेंसर बोर्ड को ही करना है। पद्मावती को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए सुनील शेट्टी ने कहा, ‘संजय लीला भंसाली जी, रणवीर सिंह जी, दीपिका पादुकोण और शाहिद कपूर बहुत ही इज्जतदार लोग हैं। राजपूत एक ऐसी कॉम है, जिसके लिए हमारे मन में बहुत इज्जत है। मैं खुद क्षत्रिय हूं, मैंगलोर का हूं, उसी कॉम का हूं, मैं यह कह सकता हूं कि 100 फीसदी उनका मकसद ये नहीं होगा कि वो किसी को दुख पहुंचाएं या कुछ नेगेटिव करें। मुझे लगता है कि एक मौका देना चाहिए जहां उन लोगों को फिल्म दिखाई जाए, जहां वे लोग फिल्म देखें और फिर फैसला लें।’

‘धड़कन’ एक्टर सुनील शेट्टी ने कहा, ‘एक ऐसी फिल्म जो पेंटिंग की तरह बनाई गई है, उसमें मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि ऐसा कुछ नहीं होगा जिससे लोगों को खराब लगे, बुरा लगे। बल्कि जैसे की अरनव ने कहा कि ये एक ऐसी फिल्म है जिसे देखकर हर राजपूत गर्व महसूस करेगा कि उसकी कॉम ने, उसकी रानी ने कितना बड़ा बलिदान किया, अपनी कॉम के लिए और अपनी इज्जत के लिए। मुझे लगता है कि एक फिल्ममेकर और एक्टर्स को एक मौका तो दिया ही जाना चाहिए। कोई कहीं बैठकर कह रहा है कि मुझे दीपिका का सिर चाहिए… हम कौन सी दुनिया में रह रहे हैं… वो भी एक औरत है, वो भी किसी की बेटी है, किसी की बहन है, किसी की दोस्त है, इसलिए मुझे लगता है कि बोलने से पहेल भी सोचना बहुत जरूरी है कि हम किसे दुख पहुंचा रहे हैं। जैसा की मैंने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं होगा फिल्म में जहां हमें शर्मिंदा होना पड़े। राजपूत हमारी, हमारे देश की शान है तो हमारी इंडस्ट्री ऐसा कोई भी काम क्यों करेगी जिससे हमारे देश के लोगों को दुख पहुंचे।’

उन्होंने पद्मावती विवाद पर राजस्थान की बात करते हुए कहा, ‘मैंने सबसे ज्यादा काम किया है राजस्थान में। अतिथि देवो भवः का असली मतलब राजपूतों से ही आता है, राजस्थान के लोगों से ही आता है। तो मुझे लगता है कि बिना राजनीति के अगर हम इसे देखेंगे तो बहुत ही बढ़िया रहेगा।’ सेंसर बोर्ड के निर्णय पर उन्होंने कहा, ‘सेंसर बोर्ड फिल्म देखकर फैसला लेगा, वो देखेगा कि इससे किसी को ठेस तो नहीं पहुंची, किसी कॉम को ठेस तो नहीं पहुंची। सेंसर की इसमें बहुत ही बड़ी भूमिका रहेगी।’

बता दें कि दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर स्टारर फिल्म पद्मावती का राजपूत करणी सेना लगातार विरोध कर रही है। करणी सेना व अन्य राजपूत समुदायों की ओर से फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है। उनका दावा है कि फिल्म में इतिहास को विकृत करके पेश किया गया है। फिल्म के कुछ दृश्यों, जिनमें फिल्म में पद्मावती का किरदार निभा रही अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की ओर से पेश नृत्य भी शामिल है, से राजपूत समुदाय के लोग नाराज हैं।

देशभर में फिल्म के विरोध में चल रही लहर की वजह से निर्माताओं ने 1 दिसंबर को फिल्म रिलीज ना करने का फैसला किया। वहीं केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने भी फिल्म को सर्टिफिकेट नहीं दिया और इसे वापस लौटा दिया था। ऐसा माना जा रहा था कि विरोध की वजह से बोर्ड ने फिल्म को सर्टिफाई करने से मना कर दिया है लेकिन असल वजह एप्लीकेशन का अधूरा होना है। हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत करते हुए सेंसर बोर्ड के सीईओ अनुराग श्रीवास्तव ने कहा- निर्माताओं ने डिस्क्लेमर नहीं दिया था। हम निर्माताओं से जानना चाहते हैं कि आपका इसपर क्या आधिकारिक स्टैंड है। यह फिक्शन पर आधारित है या फिर ऐतिहासिक तथ्यों पर- आपको यह बताना होगा। इसे बताए बिना डॉक्यूमेंट अधूरा था। परीक्षा के उद्देश्य से हमें यह पता होना चाहिए कि निर्माता फिल्म में क्या कह रहे हैं।

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