bollywood actor Anupam Kher shares her mother video who describes pain of kashmiri pandits- कश्मीरी पंडितों के विस्थापन की कहानी: अनुपम खेर की मां ने सुनाई आपबीती- एक चिट्ठी आई और छोड़ना पड़ा घर- - Jansatta
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कश्मीरी पंडितों के विस्थापन की कहानी: अनुपम खेर की मां ने सुनाई आपबीती- एक चिट्ठी आई और छोड़ना पड़ा घर

ट्वीट में खेर लिखते हैं, 'मेरी मां वैसे तो बेहद बहादुर, सकारात्मक और खुशमिजाज इंसान हैं, लेकिन 19 जनवरी 1990 को कश्मीर से विस्थापन वाली रात उनके भाई और भाभी के साथ जो कुछ हुआ, उसे याद करके उनकी आंखें भर आती हैं।'

वीडियो में अनुपम खेर की मां दुलारी (बाएं)

बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और उनके खिलाफ घाटी में हुए जुल्मों को लेकर वक्त-वक्त पर अपनी बात बेहद जोरदार ढंग से रखते रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने शुक्रवार सुबह भी एक ट्वीट किया। ट्वीट में उनकी मां दुलारी खेर का वीडियो है, जिसमें वह 90 के दशक में कश्मीरी पंडितों के एक साथ घर छोड़कर भागने की कड़वी यादें शेयर करती हैं। ट्वीट में खेर लिखते हैं, ‘मेरी मां वैसे तो बेहद बहादुर, सकारात्मक और खुशमिजाज इंसान हैं, लेकिन 19 जनवरी 1990 को कश्मीर से विस्थापन वाली रात उनके भाई और भाभी के साथ जो कुछ हुआ, उसे याद करके उनकी आंखें भर आती हैं। उन्हें अपने पीछे सब कुछ वैसे ही छोड़कर आना पड़ा। श्रीनगर के रामबाग में बने नए मकान को छोड़ना पड़ा।’

क्या है वीडियो में: वीडियो में दुलारी खेर बताती हैं कि रात के वक्त अनुपम के नाना खाना खाने ही वाले थे कि एक चिट्ठी आई। उस चिट्ठी में लिखा था कि आज आपकी बारी है और रामबाग इलाके के लोगों को मारा जाएगा। दुलारी के मुताबिक, चिट्ठी को पढ़ते ही सभी लोग बना हुआ खाना और सारा सामान छोड़कर घर पर ताला मारकर निकल गए। दुलारी बेहद भावुक होकर कहती है, ‘उन्होंने तो हमारे साथ बहुत जुल्म किया…।’ बता दें कि अनुपम के इस वीडियो पर काफी टि्वटर यूजर्स ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने लिखा कि सभी सरकारें कश्मीरी पंडितों के दुख को समझने में नाकाम रही हैं। वहीं, एक अन्य का कहना था कि जब तक ऐसे लोगों को न्याय नहीं मिल जाता, उनकी पीड़ा कभी भी कम नहीं होगी। एक यूजर का मानना था कि पीएम मोदी को इस मामले का हल निकालने के लिए कुछ वक्त की जरूरत है तो वहीं, एक अन्य यूजर ने आरोप लगाया कि कि सत्ताधारी पार्टी में पत्नी के होने की वजह से अनुपम ने अब कश्मीरी पंडितों की बातें जोरदार ढंग से रखनी बंद कर दी हैं।

पहले भी मुखर रहे हैं अनुपम खेर: अनुपम खेर खुद एक कश्मीरी पंडित हैं। वह पहले भी कश्मीरी पंडितों के विस्थापन को लेकर अपना दर्द बयां करते रहे हैं। पिछले साल जनवरी में विस्थापन के 27 साल होने के मौके पर उन्होंने एक कविता के जरिए अपनी बात रखी थी। अनुपम खेर ने ‘फैलेगा-फैलेगा हमारा मौन’ नाम से कविता शेयर की थी। इसमें उन्होंने कहा था, ‘फैलेगा-फैलेगा हमारा मौन। समुद्र के पानी में नमक की तरह। नसों में दौड़ते रक्त में घुलता हुआ पहुंचेगा दिल की धड़कनों के बहुत समीप। हमारे मौन के धमाके से बड़ा उस वक्त का कोई धमाका नहीं होगा।’ इससे पहले, जुलाई 2016 में अनुपम ने हिंसा के शिकार हुए कश्मीरी पंडितों के क्षत-विक्षत शवों की तस्वीरें शेयर करके कुछ तीखे सवाल किए थे। उन्होंने तस्वीरें शेयर कर पूछा था कि आतंकियों के मारे जाने पर चिंता जाहिर करने वाले उदारपंथी कश्मीरी पंडितों के साथ हुई हिंसा पर चुप क्यों हैं?

 

 

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