ताज़ा खबर
 

VIDEO: लाइव शो में संबित पात्रा का बयान- …तो राहुल गांधी कूड़ेदान में फेंक दिये गए होते

संजय निरुपम भी संबित पात्रा के इस बयान पर भड़क गए। निरुपम ने कहा- बीजेपी एक ऐसा असभ्य परिवार है जहां बड़े-बुजुर्गों का अपमान होता है।
बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा है कि अगर उनके नाम के आगे गांधी ना लगा होता तो वो राजनीति के डस्टबिन में फेंक दिये गए होते। संबित पात्रा यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि केवल गांधी नाम जुड़े होने के कारण इस मिसाइल (राहुल गांधी) को, जो कभी लांच नहीं हो सकता बार-बार श्री हरिकोटा में खड़ा कर देते हैं। संबित पात्रा ने ये बातें हिंदी न्यूज़ चैनल आज तक पर आयोजित एक डिबेट शो में कही। दरअसल सोमवार को सोनिया गांधी के नई दिल्‍ली के 10, जनपथ स्‍थ‍ित आवास पर हुई कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में राहुल गांधी के अगले कांग्रेस अध्यक्ष बनने के फैसले पर लगभग मुहर लग गई। 16 दिसंबर तक राहुल गांधी की ताजपोशी हो सकती है। इसी मुद्दे पर आज तक ने एक डिबेट शो रखा था जिसका विषय था कि क्या राहुल गांधी को कमान सौपने से कांग्रेस को नई ताकत मिलेगी।

इस मुद्दे पर बहस करने के लिए तमाम मेहमानों के साथ ही कांग्रेस के प्रवक्ता संजय निरुपम और बीजेपी की तरफ से संबित पात्रा भी मौजूद थे। डिबेट में एक ऐसा वक्त आया कि बीजेपी और कांग्रेस के ये नेता आपस में भिड़ गए। संजय निरुपम की बातों से नाराज पात्रा ने ये तक कह दिया कि अगर राहुल गांधी के नाम के आगे गांधी ना लगा होता तो वो राजनीति के डस्टबिन में फेंक दिये गए होते। बीजेपी प्रवक्ता ने आगे ये भी कहा कि केवल गांधी नाम जुड़े होने के कारण इस मिसाइल (राहुल गांधी) को, जो कभी लांच नहीं हो सकता बार-बार श्री हरिकोटा में खड़ा कर देते हैं।

संजय निरुपम भी संबित पात्रा के इस बयान पर भड़क गए। निरुपम ने कहा- बीजेपी एक ऐसा असभ्य परिवार है जहां बड़े-बुजुर्गों का अपमान होता है। जिस तरीके से राहुल गांधी के नाम को लेकर बीजेपी परेशान है वो इस बात को स्थापित करता है कि बीजेपी राहुल गांधी से डरती है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. M
    MIGHTY BOMBER
    Nov 20, 2017 at 10:33 pm
    राहुल गाँधी को अगर अपने विरोधियों को शांत कराना है, तो उन्हें जब कभी मौका मिले तब ऐसी मिनिस्ट्री को संभालना चाहिए जो कि बिल्कुल defunct हो और उस मिनिस्ट्री के अंतर्गत जो कुछ भी आता हो उसमें बहुत बड़ा बदलाव लाकर fully functional कर देना चाहिए. इसका यह अर्थ नहीं है कि मिनिस्ट्री को प्राइवेट सेक्टर के हाथों बेचकर उसको आर्थिक सुधार कह दें. शायद ऐसा राहुल गाँधी को यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायन्स के दूसरे कार्यकाल में ही कर लेना चाहिए था जिससे उनके आलोचक शांत हो जाते. जब तक राहुल गाँधी किसी बड़े बदलाव के हिस्सेदार नहीं होते तब तक लोग उनको प्रधान मंत्री बनने के योग्य नहीं मानेगें. भूलकर भी बड़े बदलाव का अर्थ प्राइवेटाइजेशन या डिस-इन्वेस्टमेंट या प्राइवेट सेक्टर को सब कुछ सौंपना न समझा जाये. अगर गुजरात चुनाव के नतीजे आने के बाद राहुल गाँधी सिंहासन पर बैठते तो ज्यादा अच्छा होता.
    (0)(0)
    Reply
    1. H
      Hardik
      Nov 20, 2017 at 8:36 pm
      Sham means a lie, sh t means filth and patra means a bowl. So shambit patra is nothing but a bowl full of filth and lies.
      (0)(1)
      Reply