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डिबेट: एंकर से बोले बीजेपी नेता- थोड़ा देश के लिए भी सोचो, जवाब मिला-संबित पात्रा आपसे सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं

एंकर ने तंज कसते हुए कहा कि यही बात यदि कश्मीर में भी याद रखते तो सरकार छोड़कर भागना नहीं पड़ता। इस पर संबित पात्रा ने कहा कि कोई सरकार छोड़कर नहीं भाग रहा है आप लोग लेफ्ट के लोगों को सपोर्ट करना छोड़ दीजिए।

Author September 10, 2018 9:17 AM
भाजपा नेता संबित पात्रा। (file pic)

भीमा कोरेगांव हिंसा और अर्बन नक्सल के आरोप में नजरबंद रखे गए 5 सामाजिक कार्यकर्ताओं का मुद्दा इन दिनों देश में छाया हुआ है। आज तक टीवी चैनल पर डिबेट कार्यक्रम के दौरान इस मुद्दे पर एंकर और भाजपा नेता के बीच काफी गरमा-गरमी देखने को मिली। दरअसल एंकर ने इस मामले में पुणे पुलिस की कारवाई पर सवाल खड़़े किए। इस पर भाजपा नेता संबित पात्रा ने पुणे पुलिस की कारवाई का समर्थन करते हुए कहा कि हम पुलिस के साथ खड़े हैं। पुलिसकर्मी बहुत विपरीत परिस्थितियों में काम करती है और हम यहां बैठकर उनके के खिलाफ बात करना आसान है, लेकिन यदि एक दिन उनके स्थान पर जाकर काम करना पड़े तो पता चले।

इस पर एंकर ने तंज कसते हुए कहा कि यही बात यदि कश्मीर में भी याद रखते तो सरकार छोड़कर भागना नहीं पड़ता। इस पर संबित पात्रा ने कहा कि कोई सरकार छोड़कर नहीं भाग रहा है आप लोग लेफ्ट के लोगों को सपोर्ट करना छोड़ दीजिए। आप यहां बैठकर पुलिस और जवानों के खिलाफ बोलना छोड़ दीजिए। इसके बाद जब गरमा गरम बहस हुई तो संबित पात्रा ने कहा कि आप देश के लिए भी सोचिए। इस पर एंकर ने भी पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें संबित पात्रा से देश के बारे में सोचने के लिए सर्टिफिकेट लेने की जरुरत नहीं है।

एंकर की इस बात से संबित पात्रा इतना खफा हो गए कि उन्होंने यहां तक कह दिया कि वह छाती ठोककर कहते हैं कि ये लोग (जिन्हें पुलिस ने भीमा कोरेगांव मामले में नजरबंद किया है) नक्सली हैं और हम ये केस सुप्रीम कोर्ट में जीतेंगे। चाहे आप घोड़े खोल दीजिए उन्हें बचाने के लिए, हम जीतेंगे। इस पर एंकर ने कहा कि कोर्ट में कहिएगा ये बात। संबित पात्रा ने कहा कि टीवी पर भी बोलेंगे और कोर्ट में भी कहेंगे। हम देशभक्तों के साथ खड़े रहेंगे नक्सलियों के साथ नहीं। बता दें कि नक्सिलयों के साथ संबंधों और भीमा कोरेगांव हिंसा के आरोप में पुणे पुलिस ने वारावरा राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, वेरनोन गोंजाल्वेस, अरुण फेरेरा को 28 अगस्त को गिरफ्तार किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इन सामाजिक कार्यकर्ताओं को घर में नजरबंद रखा गया है।

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