चंद्रशेखर आजाद से पूछा – मायावती से आपका रिश्ता कैसा है? इस सवाल पर भीम आर्मी चीफ ने दिया था कुछ ऐसा जवाब

आजाद ने पूछा था कि क्या चुनाव लड़ना ही राजनीति होती है? चुनाव के समय केवल वोट मांगने जाना ही राजनीति नहीं होती।

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भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद (फाइल फोटो)

भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद इन दिनों उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी में लगे हुए हैं। उनकी पार्टी इस चुनाव में किसके साथ गठबंधन करेगी इसको लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। आजाद अपनी जनसभाओं के दौरान पिछड़े समाज की बात करते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि पिछली सरकारें केवल दलितों के नाम पर वोट मांगती रही लेकिन उनके लिए कोई काम नहीं किया।

आजाद से न्यूज़ 24 के एक इंटरव्यू के दौरान पूछा गया था कि क्या आप उत्तर प्रदेश में दलितों के दूसरे नंबर के नेता नहीं हैं? इस पर आजाद ने कहा था, ” मुझे नेता मत कहिए बल्कि यह कहिए कि गरीबों के लिए सबसे ज्यादा लेने वाला कोई है तो वह भीम आर्मी का चंद्रशेखर आजाद है।” उनसे बसपा प्रमुख मायावती के साथ रिश्तो को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि वह कोई रिश्ता नहीं मानती और हम सामाजिक रुप से रिश्ता मानते हैं। हम दोनों के बीच इतना सा रिश्ता है।

आजाद ने कहा था, ” उन्होंने हमारे साथ आने को सिरे से नकार दिया था। हम केवल अपना काम कर रहे हैं। वह अपनी पार्टी और विचारधारा को लेकर सम्मेलन कर रहे हैं और हम अपनी पार्टी को इसी तरह से मजबूत बना रहे हैं। वह रिश्ते में मुझे क्या मानती हैं इससे उत्तर प्रदेश का कोई भी भला नहीं होने वाला है।”

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आप यूपी चुनाव में दलितों का वोट काटने के लिए उतरे हुए हैं ऐसा बहुजन समाज पार्टी के नेता आप पर आरोप लगाते हैं? इस पर आजाद ने कहा था, ” उनको सही पता है कि हम चुनाव में दलितों का वोट काटेंगे। हमने पहले ही उन्हें आगाह किया था जी उत्तर प्रदेश को बचा लो लेकिन वह बचाना ही नहीं चाहते।” उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा था कि मैं चाहता हूं कि इस मंच पर केवल उत्तर प्रदेश के मुद्दों को लेकर बात की जाए।

जिस पर एंकर ने कहा था कि आप अपने पत्ते खोलिए और बताइए कि उत्तर प्रदेश के कितने सीटों पर आप चुनाव लड़ेंगे। जिसके बाद हम आपसे मुद्दों को लेकर बात करें। इसके जवाब में आजाद ने पूछा था कि क्या चुनाव लड़ना ही राजनीति होती है? चुनाव के समय केवल वोट मांगने जाना ही राजनीति नहीं होती। उन्होंने कहा था कि अपने प्रदेश की जनता को अपने हक के बारे में बताना भी राजनीति होती है।

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