अगर काम किए होते तो न चिल्लाना पड़ता ‘अब्बा अब्बा’ – योगी आदित्यनाथ पर असदुद्दीन ओवैसी ने यूं साधा निशाना

एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने योगी आदित्यनाथ के ‘अब्बा जान’ वाले बयान पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने योगी आदित्यनाथ के कामकाज पर भी सवाल उठाया है। ओवैसी ने सीएम योगी पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर उन्होंने काम किया होता तो अब्बा अब्बा न चिल्लाना पड़ता। उत्तर प्रदेश में आने वाले विधानसभा […]

Uttar Pradesh, Yogi Adityanath
असदुद्दीन ओवैसी ने योगी आदित्यनाथ के 'अब्बा जान' वाले बयान पर जमकर निशाना साधा है। (फोटो सोर्स – पीटीआई)

एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने योगी आदित्यनाथ के ‘अब्बा जान’ वाले बयान पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने योगी आदित्यनाथ के कामकाज पर भी सवाल उठाया है। ओवैसी ने सीएम योगी पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर उन्होंने काम किया होता तो अब्बा अब्बा न चिल्लाना पड़ता।

उत्तर प्रदेश में आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर असदुद्दीन ओवैसी इन दिनों यूपी की राजनीति में सक्रिय नजर आ रहे हैं। ओवैसी ने सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अगर काम किए होते तो अब्बा, अब्बा चिल्लाना नहीं पड़ता। उन्होंने योगी आदित्यनाथ के ‘अब्बा जान’ वाले बयान पर ट्वीट करते हुए लिखा कि कैसा तुष्टिकरण? प्रदेश के मुसलमानों की साक्षरता-दर सबसे कम है, मुस्लिम बच्चों का ड्रॉपआउट रेट सबसे ज़्यादा है। मुस्लिम इलाक़ों में स्कूल-कॉलेज नहीं खोले जाते।अल्पसंख्यकों के विकास के लिए केंद्र सरकार से बाबा की सरकार को ₹16207 लाख मिले थे, बाबा ने सिर्फ ₹1602 लाख खर्च किया।

उन्होंने लगातार तीन ट्वीट किए हैं। जिसमें उन्होंने लिखा है कि 2017-18 में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत मात्र 10 मुसलमानों को घर मिले। ‘अब्बा’ के बहाने किसके वोटों का पुष्टिकरण हो रहा है बाबा? देश के 9 लाख बच्चे गंभीर तौर पर कुपोषित हैं, जिसमें से 4 लाख बच्चे सिर्फ़ उ.प्र से हैं।

उन्होंने एक तीसरा ट्वीट करते हुए लिखा कि ग्रामीण उत्तर प्रदेश में 13944 sub-centres की कमी है, 2936 PHC की कमी है, 53% CHC की कमी है। केंद्र सरकार के मुताबिक़ बाबा-राज में उ.प्र के PHC में सबसे कम डॉक्टर मौजूद हैं। कुल 2277 डाक्टरों की कमी है। अगर काम किए होते तो “अब्बा, अब्बा” चिल्लाना नहीं पड़ता। असदुद्दीन ओवैसी के ट्वीट पर तमाम लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी है।

एक ट्विटर यूजर ने कमेंट किया है कि कुछ चीजें आपको खुद से भी देखनी पड़ती है किंतु आप ऐसा करते नहीं। आप जब पढ़ना नहीं चाहते तो उसमें सरकार क्या करेगी? @nasimrahmanmani80 ट्विटर अकाउंट से लिखा गया कि क्या करें बाबा उनको तो नाम बदलने से ही फुर्सत नहीं है। एक टि्वटर यूजर ने उनके इस ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि यूपी में चुनाव में ये यह सब चलेगा मेहरबान, क़द्रदान, अब्बाजान, बाबाधाम, ओवैसीकमान, टीपू सुल्तान, अम्मीजान, बहिन जी का फ़रमान, फिर होगा जय हनुमान, वोटरों का करें सम्मान।

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