प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गुजरात में एक उद्घाटन कार्यक्रम में मिडिल ईस्ट संकट को देखते हुए लोगों से पेट्रोल डीजल की खपत कम करने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने, अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने, एक साल तक सोना ना खरीदने, घर से काम करने, किसानों से रासायनिक खाद का इस्तेमाल 50 फीसदी तक काम करने की अपील की। पीएम मोदी की इस अपील के बाद विपक्ष उन पर हमलावर हो गया है। इससे पहले 10 मई तो तेलंगाना में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोगों से खर्चों में कटौती की अपील की थी।
एक तरफ सरकार इसे मिडिल ईस्ट में संकट के बीच सामूहिक जिम्मेदारी और लॉन्ग टर्म एनर्जी सिक्योरिटी की दिशा में अहम कदम बता रही है तो दूसरी ओर विपक्ष इसे आर्थिक दबाव के संकेत और आम लोगों पर बोझ डालने की कोशिश मान रहा है।
विपक्ष ने प्रधानमंत्री के अपील पर उठाए सवाल
विपक्ष इस अपील की टाइमिंग को लेकर भी सवाल कर रहा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में युद्ध और वैश्विक संकट फरवरी से जारी था तो सरकार ने चुनाव खत्म होने के बाद लोगों से बचत और संयम की अपील क्यों की?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक पर लिखा, “28 फरवरी को मिडल ईस्ट में जंग शुरू हुई लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार में बिजी रहे जब सरकार स्थिति काबू है पहले कह रही थी तो अब अचानक से यह मत खरीदो वह मत करो जैसे अपील क्यों कर रही है।”
इधर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सवाल उठाया, “अगर ईंधन बचत इतना जरूरी थी तो चुनाव प्रचार के दौरान हजारों चार्टर हवाई यात्राएं क्यों कि गई। उन्होंने कहा ऐसे अपीलों से बाजार में डर- घबराहट और निराशा फैल सकती है।”
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा,”मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे सोना मत खरीदो विदेश मत जाओ पेट्रोल कम जलाओ खाद और खाने का तेल कम करो मेट्रो में चलो घर से कम करो यह उपदेश नहीं है नाकामी के सबूत हैं 12 साल में देश को इस मुकाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है क्या खरीदें, क्या ना खरीदें, कहां जाएं, कहां ना जाएं। हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि खुद जवाब देने से बच जाए देश चलाना अब कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम के बस की बात नहीं।”
हालांकि 11 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्ष में हुई मंत्रियों की सामूहिक बैठक में सरकार ने कहा देश में किसी तरह की कमी नहीं है सरकार ने का बताया भारत के पास 60 दोनों का कच्चा तेल 7 दोनों का प्राकृतिक गैस और 45 दोनों का एलपीजी स्टॉक है और विदेशी मुद्रा भंडार 703 अरब डॉलर है।
ऐसे में सरकार का बचाव करने वाले नेताओं ने कहा कि अन्य सरकारों ने भी सोना न खरीदने जैसी अपील की थी। कुछ भाजपा नेताओं ने कहा कि तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिंदबरम ने भी लोगों से सोना न खरीदने की अपील की थी और कुछ ने इंदिरा गांधी का भी नाम लिया। हालांकि इंदिरा गांधी ने सोने के कुछ सामान खरीदने को लेकर नागरिकों पर प्रतिबंध लगा दिया था।
पी. चिदंबरम ने क्यों की थी सोना न खरीदने की अपील?
2013 में डॉलर की मांग तेजी से बढ़ रही थी, और भारतीय रुपया तेजी से कमजोर हो गया था। विदेशी निवेशक भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर काफी चिंतित थे। लेकिन भारतीय लोग रिकॉर्ड मात्रा में सोना खरीद रहे थे। सरकार को डर लगने लगा था कि अगर लोगों ने सोना खरीदना कम नहीं किया तो आर्थिक संकट आ सकता है।
उस दौरान भारत का चालू खाता घाटा काफी बढ़ गया था। आसान भाषा में कहें तो भारत विदेशों से अधिक सामान खरीद रहा था लेकिन उतना सामान आयात नहीं कर पा रहा था। भारत का सबसे अधिक कच्चा तेल और सोने के आयात पर खर्च कर रहा था।
ऐसे में 13 जून 2013 को तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिंदबरम में लोगों से सोने की खरीदारी से बचने का आग्रह किया था और कहा था यह मानना गलत है कि सोना सबसे सुरक्षित निवेश है।
पी. चिदंबरम ने कहा था लोग 6 महीने से 1 साल तक सोना न खरीदें, अगर मेरी एक इच्छा है जिससे भारत की जनता कोई पूरा कर सकती है तो वह है सोना ना खरीदना। उन्होंने कहा कि इससे चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को सुधार होगा। हालांकि सरकार की ओर से उठाए गए कदमों से सोने के आयात में कमी आई है। सरकार ने उस दौरान गोल्ड इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी थी।
पी. चिदंबरम ने आगे कहा था कि मैं मानता हूं कि अगर भारत की जनता सोने की मांग न करें अगर हम एक साल तक सोने का निर्यात न करना पड़े। सोचिए इससे पूरी स्थिति में कितना बदलाव आएगा। सोने का हर एक औंस आयात किया जाता है आप रुपए में भुगतान करते हैं हमें डॉलर देने पड़ते हैं।
सरकार की चाहती थी कि लोग सोने के बजाय बैंक में पैसे डिपोजिट, फाइनेंशियल इंवेस्टमेंट और बॉन्ड में पैसे डालें ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सके।
इंदिरा ने बना दिया था सोने की खरीद पर कानून
1960 के दशक में भारत की अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव था। उस समय भारत ने दो युद्ध- 1962 की चीन के साथ और फिर 1965 में पाकिस्तान के साथ लड़ा था। इसके अलावा, लगातार सूखा और खाद्यान्न संकट बना हुआ था। विदेश मुद्रा की भारी कमी हो गई थी। उस दौरान भारत काफी सारी चीजें आयात करता था, जैसे मशीनें, पेट्रोलियम खाद्यान्न आदि। लेकिन लोगों में सोना खरीदने की परंपरा बहुत मजबूत थी। लोग भारी मात्रा में सोने की खरीदारी करते थे खासकर शादियों के सीजन में, इससे देश का विदेशी मुद्रा तेजी से खर्च हो रहा था।
ऐसे में सरकार को डर लगने लगा था कि अगर उनका डॉलर का भंडार और कम हुआ तो जरूरी सामान आयात करना मुश्किल हो जाएगा। इससे अर्थव्यवस्था अधिक कमजोर हो जाएगी और रुपये पर भी दबाव बढ़ जाएगा। इसी कारण इंदिरा सरकार स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम लेकर आई।
तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने भारत में सोने की बढ़ती मांग को कम करने के लिए एक कानून बना दिया था। 1968 में, इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान, वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम ( Gold Control Act, 1968) पास करवाया, जिसके तहत नागरिकों को सोने की छड़ें या सिक्के रखने पर बैन लगा दिया गया। साथ ही सुनारों के लिए सख्त नियम बनाए।
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लोगों से कहा कि यह देशहित के लिए जरूरी है। इस कानून का उद्देश्य सोने की मांग को कम करना, तस्करी को रोकना और चीन के साथ सीमा विवादों के मद्देनजर भारतीय रुपये की रक्षा करना था।
हालांकि इन नियमों का एक बड़ा नुकसान भी हुआ, सोने की तस्करी बढ़ गई और काला बाजारी फैल गई। इंदिरा सरकार के इस कानून के कई छोटे सुनार काफी प्रभावित हुए। करीब दो दशक से अधिक बाद इस अधिनियम को 1990 में निरस्त कर दिया गया था।
क्या इंदिरा गांधी ने भी की थी अपील?
हालांकि सोशल मीडिया पर द हिंदू अखबार एक कंटिंग को लेकर दावा किया जा रहा कि पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने भी लोगों से सोना न खरीदने की अपील की थी, इंदिरा गांधी ने अपील नहीं की थी बल्कि कानून बनाया था। ऐसे में दावा पूरी तरह गलत है। अखबार द हिंदू ने भी इस कंटिंग को फर्जी बताया है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न वैश्विक व्यवधानों को देखते हुए दूसरे दिन फिर खर्च में कटौती की अपील दोहराई और कोविड-काल की आदतें अपनाने को कहा। वडोदरा में सोमवार को देर रात एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने लोगों से ईंधन की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन एवं इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करने और सोने की खरीद कुछ समय के लिए टालने की अपील की। इससे पहले गिर सोमनाथ में आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव के दौरान उन्होंने 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण की याद दिलाते हुए कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती या दबाव में नहीं ला सकती है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
