अनिल विज ने पूछा- जब सरकार ने किसानों की मांगें मान ली तो क्यों नहीं मनाया जश्न, टिकैत बोले- हमारे 750 भाई मर गए तो हम भांगड़ा कैसे पाते

किसान नेता राकेश टिकैत ने विज के उलाहने पर पलटवार करते हुए कहा कि ये लोग बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटीज से पढ़कर निकले हैं। लेकिन इन्हें गांवों के ताने-बाने का पता नहीं है। हमारे 750 लोग आंदोलन के दौरान शहीद हो गए। क्या घर में मौत होने पर कोई भंगड़ा करता है।

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हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज व राकेश टिकैत। (फोटोः एजेंसी)

तीन कृषि कानून वापस होने के बाद सरकार को लगता है कि किसानों को जश्न मनाकर पीएम नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा करना चाहिए था। लेकिन किसान नेताओं का मानना है कि मांगें पूरी होते-होते उनके 750 लोग शहीद हो गए। ऐसे में वो किस तरह से जश्न मनाकर उनकी शहादत का अपमान करते।

दरअसल, एक टीवी चैनल पर हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने किसान नेताओं को उलाहना देते हुए कहा कि ये तो जश्न की बात थी। किसानों को भंगड़ा डालकर जलेबियां बांटनी चाहिए। विज इस बात से भी आहत दिखे कि इतने अहम फैसले के बाद भी किसान नेताओं ने पीएम मोदी का धन्यवाद तक नहीं किया। उनका कहना था कि इतना काम तो करना चाहिए था। किसान सरकार का धन्यवाद करते। विज ने यह भी कहा कि किसानों की बाकी मांगों पर भी सरकार विचार कर रही है।

उधर, किसान नेता राकेश टिकैत ने विज के उलाहने पर पलटवार करते हुए कहा कि ये लोग बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटीज से पढ़कर निकले हैं। लेकिन इन्हें गांवों के ताने-बाने का पता नहीं है। हमारे 750 लोग आंदोलन के दौरान शहीद हो गए। क्या घर में मौत होने पर कोई भंगड़ा करता है। क्या किसी की मौत होने पर कोई जलेबियां बांटकर जश्न मनाता है। उनका कहना था कि किसान अपने साथियों की मौत पर गमगीन है। जिन लोगों की शहादत हुईआ उन्होंने सर्दी गर्मी बरसात की परवाह किए बगैर डटकर संघर्ष किया। इसी जद्दोजहद में उनकी जान चली गई।

उधर. राकेश टिकैत के बड़े भाई और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने केंद्र सरकार के कृषि कानून निरस्त करने के कदम का मंगलवार को स्वागत किया, लेकिन साथ ही उन्होंने मांग की कि आंदोलन कर रहे किसानों से एमएसपी के साथ अन्य मुद्दों पर बातचीत की जाए।

संसद में सोमवार को कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने संबंधी विधेयक को पारित कर दिया गया था। किसान पिछले एक साल से इन कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। नरेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर जारी आंदोलन को खत्म करने के बारे में निर्णय संयुक्त किसान मोर्चा करेगा। एसकेएम के नेतृत्व में ही करीब 40 किसान यूनियन आंदोलन कर रहे हैं।

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