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BJP की जबतक विदाई नहीं, तब तक कोई ढिलाई नहीं-जाट नेताओं से मिले अमित शाह तो OP राजभर ने यूं कसा तंज

जाट नेताओं से अमित शाह की मुलाकात पर ओपी राजभर ने तंज कसते हुए कहा है कि जब तक बीजेपी की विदाई नहीं, तब तक कोई ढिलाई नहीं।

OP Rajbhar Photo, OP Rajbhar Yogi Photo
सुभासपा पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर (फोटो सोर्स – पीटीआई)

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चुनाव में जाट समुदाय, चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाता है। इस बार जाट समुदाय के नेता बीजेपी से नाराज बताए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि जाट नेताओं को मनाने के लिए ही अमित शाह ने अपने आवास पर मीटिंग का आयोजन किया था। जिसमें करीब 200 से अधिक समुदाय के नेताओं समेत कई जाट नेता भी शामिल हुए। कृषि कानूनों, किसान आंदोलन के दौरान बीजेपी के रवैये और आरक्षण जैसे कई मुद्दों पर जाट समुदाय के लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।

बुधवार को देश के गृह मंत्री अमित शाह ने जब जाट नेताओं से मुलाकात की तो इसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हुई। विपक्ष के नेताओं ने एकमत होकर अमित शाह के मीटिंग पर तंज कसा है। ABP न्यूज़ से बात करते हुए अखिलेश यादव के सहयोगी ओपी राजभर ने कहा कि बीजेपी को अब हार का डर सताने लगा है, इसलिए घर-घर जाकर पर्चा बांटना पड़ रहा है।

ओपी राजभर ने कहा कि 12 महीने तक किसान गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे थे, तब गृह मंत्री उन किसानों से ना मिलने गए और ना ही बुलाया। अब जब चुनाव में लग रहा है कि हार जाएंगे तो जाट नेताओं से मिल रहे हैं और घर-घर जाकर पर्चा बांटने पर मजबूर हैं। ओपी राजभर ने कहा कि जाट नहीं, बल्कि किसान नाराज है और किसानों की कोई जाति नहीं होती। अमित शाह ने एक जाति के लोगों से मुलाकात की है और जिन लोगों से अमित शाह ने मुलाक़ात की, वे लोग किसान आंदोलन में शामिल नहीं थे।

ओपी राजभर ने कहा कि किसानों पर जीप चढ़ाकर मार दिया गया लेकिन जीप गृह राज्यमंत्री के नाम पर थी इसलिए अभी तक उनपर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जीप किसी और की होती तो मालिक अब तक जेल में होता। ये चाहे दिल्ली बुलाएं या मुंबई बुलाकर समझाएं, एक नारा इस वक्त खूब चल रहा है कि जब तक बीजेपी की विदाई नहीं, तब तक कोई ढिलाई नहीं।

एक तरफ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सरकार के प्रति नाराजगी से बीजेपी की टेंशन बढ़ गई है तो दूसरी तरफ वोटरों को साधने के लिए समाजवादी पार्टी और रालोद के बीच गठबंधन हुआ है। इसीलिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी के लिए चुनौती बढ़ गई है और अब अमित शाह ने खुद पश्चिमी यूपी की कमान संभाल ली है।

इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव के वक्त भी अमित शाह ने जाट समुदाय को ध्यान रखते हुए ऐसी ही एक बैठक की थी। जिसका नतीजा ये निकला कि बीजेपी ने 143 में से 108 सीटें अपने नाम कर ली थीं। 2019 में लोकसभा चुनाव के वक्त भी बीजेपी को जाटों का समर्थन मिला तो 29 में से 21 सीटों पर बीजेपी ने कब्जा कर लिया था। अब एक बार फिर जाटों को साथ लाने के लिए बीजेपी की तरफ से पूरी कोशिश की जा रही है। 

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