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हैंड्सफ्री हेयर कटिंग! हाथ से नहीं, मुंह से बाल काटता है यह शख्स, देखकर रख जाएंगे हैरान

उत्तर प्रदेश के वाराणसी के अहमद अंसार अक्सर अपनी एक खास प्रतिभा के कारण सुर्खियों में आ जाते हैं। अंसार को भारत का इकलैता मुंह से बाल काटने वाला नाई माना जाता है। अंसार की लोकप्रियता का आलम यह है कि उन पर डॉक्यूमेंट्रीज बन रही हैं। एक डॉक्यूमेंट्री में अंसार ने मुंह से बाल काटने के पीछे बेहद भावुक कहानी बताई।

वाराणसी के अहमद अंसार मुंह में कैची फंसाकर बाल काटने वाले भारत के इकलौते बारबर माने जाते हैं। (एएनआई के वीडियो से लिया गया सक्रीनशॉट, सोर्स- Youtube/ANI News)

उत्तर प्रदेश के वाराणसी के अहमद अंसार अक्सर अपनी एक खास हुनर की वजह से सुर्खियों में रहते हैं। अंसार को भारत का इकलैता मुंह से बाल काटने वाला नाई माना जाता है। अंसार की लोकप्रियता का आलम यह है कि हिस्ट्री टीवी तक ने इन पर खास डॉक्यूमेंट्री बनाई है। डॉक्यूमेंट्री में अंसार ने मुंह से बाल काटने के पीछे एक बेहद भावुक कहानी बताई। अंसार के मुताबिक मुंह से बाल काटने का हुनर यूं ही नहीं आ गया, हालातों के चलते उन्हें यह सीखना पड़ा। वह बताते हैं कि 2008 में उनका एक हाथ का फ्रैक्चर हो गया था, जिसके चलते बेड रेस्ट लेना पड़ा। उस दौरान एक ख्याल ने मन में इस हुनर का बीज बो दिया। अंसार बताते हैं कि हाथ फ्रैक्चर के दौरान उन्होंने सोचा कि अगर हालात ने कभी अपंग कर दिया तो क्या भीख मांगकर गुजारा करेंगे? बस, यही सोचकर मुंह में कैची फंसाकर प्रेक्टिस शुरू कर दी। अंसार बताते हैं कि करीब दो साल लगे उन्हें यह हुनर अपने अंदर लाने में।

मुंह से बाल काटने के हुनर ने अंसार को आम नाई से खास तो बना ही दिया था लेकिन जिंदगी की एक घटना ने उन्हें हीरो बना दिया। अंसार बताते हैं कि इसी धंधे से जुड़े उनके एक करीबी दोस्त के बेटे को ब्लड कैंसर हो गया था और इलाज के लिए 6 लाख रुपयों की जरूरत थी। रुपयों का इंतजाम करने के लिए उन्हें आइडिया आया कि क्यों न मुंह से बाल काटकर पैसे जुटाए जाएं। उन्होंने एक कपड़े पर लिखा, ”मैं ये बच्चे के लिए बाल काट रहा हूं, हमें इतने पैसे की जरूरत है.. और मुंह से बाल काटूंगा, 24 घंटे काटूंगा, न खाऊंगा न पियूंगा, जब तक इतना फंड नहीं होगा मैं ऐसे ही बाल काटूंगा और फ्री काटूंगा, उसका अमाउंट था 6 लाख रुपया.. और लोगों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया, और 24 घंटा से पहले-पहले 20 घंटे में 6 लाख रुपये मैंने इकट्ठा कर लिया।”

गजब की बात यह भी है कि अंसार को मुंह से भी बाल काटने में उतना ही समय लगता है जितना की हाथ से। इस मामले में प्रतिस्पर्धा करने पर वह स्थानीय नाइयों से अव्वल रह चुके हैं। अंसार बताते हैं कि इस हुनर को बनाए रखने के लिए उन्हें अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। जबड़े को तैयार करना पड़ता है, इसके लिए सुबह दातों में नमक घिसते पड़ता है और दिन-दिनभर च्विंगम चबानी पड़ती है। अंसार कहते हैं कि अगर कभी ढेर सारा पैसा हुआ तो दिव्यांगों के लिए एक ट्रेनिंग सेंटर खोलेंगे और उन्हें यह हुनर सिखाएंगे। वह कहते हैं कि यही इबादत और इंसानियत है।

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